मूढ़ी बकापुर में राजस्व टीम ने लगभग तीस बीधा सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराई
चाहे जहां रातोंरात कब्जे करें चाहे खुद पुलिस चौकी पर ही क्यों ना हो योगी जी के राज़ में भी भूमाफियाओं की पौ बारह।

औरंगाबाद (बुलंदशहर)ग्राम मूढ़ी बकापुर में राजस्व विभाग की टीम ने अवैध कब्जे दारों के जबड़े से लगभग तीस बीधा सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराने का दावा किया है। लेकिन औरंगाबाद के भूमाफियाओं पर राजस्व विभाग नजरे इनायत किये हुए नजर आ रहा है। औरंगाबाद में तो खुली छूट दे रखी है कि जहां मर्जी हो कब्जा करो चाहे जमीन पुलिस चौकी की हो या फिर किसी धार्मिक स्थल की। बस सुविधा शुल्क में कोई कोताही नहीं बरतनी होगी। पैसे दो काम कराओ की नीति के चलते औरंगाबाद में भूमाफियाओं की पौ बारह है।
तहसील सदर के ब्लाक लखावटी अंतर्गत गांव मूढ़ी बकापुर में फिलहाल राजस्व विभाग की एक टीम ग्राम समाज की भूमि को कब्जा मुक्त कराने में जुटी हुई है। ग्रामीण बताते हैं कि दबंग भूमाफियाओं ने गांव की लगभग साढ़े चार सौ बीधा जमीन पर अवैध कब्जे किये हुए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को अनेकों बार शिकायती पत्र भेजकर उनसे अवैध कब्जे दारों से ग्राम समाज की भूमि कब्जा मुक्त कराने की गुहार लगाई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अवैध कब्जे हटवाए जाने की गुहार लगाई जिसपर शासन ने भूमाफियाओं के कब्जे हटाने के निर्देश दिए। जिसपर राजस्व विभाग के नायब तहसीलदार संदीप कुमार लेखपाल विकल धामा आदि ने गांव में पहुंच कर लगभग तीस बीधा जमीन कब्जा मुक्त कराई । नायब तहसीलदार का कहना है कि कार्रवाई जारी है।
दूसरी ओर तहसील सदर के ही औरंगाबाद कस्बे में भूमाफियाओं पर किसी भी सरकारी अधिकारी,शासन प्रशासन की पेश नहीं चलती दिखाई देती। यहां भूमाफियाओं ने हजारों बीधा जमीन पर अवैध कब्जे कर लिये। पिछले सालों में पोखरों तालाबों, रास्तों, सरकारी बिल्डिंगों यहां तक कि अंग्रेजी हुकूमत से चले आ रहे पुराने थाना भवन को रातों रात ढ़हा दिया गया लेकिन किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। यूपी इंडस्ट्रीज चेयरमैन तरसेम गूर्जर ने मामले की शिकायत प्रशासन और शासन से की लेकिन नतीजा सिफर ही नजर आया। अधिकारी जांच चल रही है का टके सा जवाब देकर मौन साध लेते हैं।
यही हाल बूढ़े बाबू दौज मेला मैदान के अवैध कब्जे का है। मंदिर कमेटी तमाम प्रशासनिक अधिकारियों और शासन तक से गुहार लगाते लगाते थक गई लेकिन पैमाइश कराने का आश्वासन देकर पीछा छुड़ा लिया जाता है। देखना दिलचस्प होगा कि औरंगाबाद कस्बे में आखिर कब भूमाफियाओं पर शासन प्रशासन की नजर टेढ़ी हो पायेगी। टेढ़ी होगी भी या फिर नजरें इनायत का सिलसिला पूर्ववत जारी रहेगा।
रिपोर्टर राजेंद्र अग्रवाल






