बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना – दिव्य अग्रवाल (विचारक व लेखक)

विचार:प्रत्येक घटनाक्रम को हिन्दू मुस्लिम के दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता पर जब जमीयत उलेमा ऐ हिन्द जैसे इस्लामिक संगठन कॉक्रोच पार्टी के समर्थन में आ जाएं तो फिर प्रश्न उठना स्वाभाविक है । इसके साथ ही साथ जिन राजनीतिक दलों ने अपना कोई आंदोलन नहीं किया उनका शीर्ष नेतृत्व भी नव निर्मित कॉकरोच पार्टी के समर्थन में सड़को पर है तो यह संदेह तो होगा ही की कॉकरोच पार्टी को किन लोगो का समर्थन है क्या भारत को अस्थिर करने का षड्यंत्र है ।
हास्यास्पद कहें या आश्चर्यजनक कुछ लोग ऐसे भी देखने को मिले जो गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार से अत्यंत प्रभावित थे पर अचानक उन सपाइयों के पक्ष में बोलने लगे जिनके शासनकाल में उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त थी । जिन लोगों को सपा नेतृत्व में छात्र शक्ति और नारी शक्ति नजर आ रही है तो छात्रों की नौकरी पेपर देकर लगती थी या पैसे देकर यह भी जग जाहिर है और रही बात नारी सम्मान की रक्षा की तो डासना मंसूरी कांड , रामपुर तिराहा कांड, मुजफ्फरनगर का कवाल कांड स्मरण कर लेना चाहिए जब हिन्दू नारी शक्ति के असहनीय अपमान पर तत्कालीन सरकार ने मौन धारण कर लिया था।
निजी कुंठा और व्यक्तिगत लोभ में असत्य को सत्य और सत्य को असत्य करने का प्रयास सदैव विफल रहता है । हाँ जिन लोगों के कारण पेपर लीक हुए हैं उनके विरुद्ध विधिकपूर्वक कठोर कार्यवाही की मांग करना उचित है जिस पर केंद्र सरकार को गंभीर निर्णय लेना चाहिए लेकिन भारत का युवा छात्र किसी प्रकार की अराजकता और वामपंथियों के राजनीतिक षड्यंत्र में फसकर अपना भविष्य और परिवार के सपने खराब न करें ।






