अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या अभद्रता की प्रवृत्ति – दिव्य अग्रवाल ( विचारक व लेखक )

विचार:यह कैसी तथाकथित नैसर्गिकता है? यह कैसा विरोध है, जिसमें विचारों की असहमति के स्थान पर अभद्रता और अशिष्ट भाषा को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया जा रहा है? भारत की युवा पीढ़ी इतनी संस्कारहीन कैसे होती जा रही है? क्या अब शिक्षा का प्रमाण यह माना जाएगा कि व्यक्ति जितनी अधिक गंदी और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करे, वह उतना ही आधुनिक और जागरूक कहलाया जाएगा ?
भले आपको आज कॉकरोच पार्टी लुभा रही हो पर भूलना मत इसी प्रकार के आंदोलन से एक और पार्टी निकली थी और उसने खालिस्तानियों का कितना समर्थन किया यह जगजाहिर है।
क्या आंदोलन अराजकता, अभद्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अस्मिता को अस्थिर करने हेतु किए जा रहे हैं विद्यार्थियों की वास्तविक मांग को अराजक राजनीति और सनातन विरोधी राजनेताओं ने अपने लाभ हेतु साध लिया लिया है।
दिल्ली कनाट प्लेस के प्राचीन हनुमान मंदिर क्षेत्र में पत्थरबाजी की गयी जबकि वहां एक मस्जीद है वहां एक कंकड़ भी नहीं गया यह कैसा शिक्षा की लड़ाई का आंदोलन है जिसमें नारे लगाए जा रहे हैं की बस अल्लाह तेरा एक नाम रहेगा ?
शिक्षित माता पिता से आग्रह है की अपने बच्चो को अपने अधिकार की बात कहने के साथ साथ अराजक और सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाले आंदोलनों से बचना भी सिखाएं।






