ज़रा सी बारिश और ग्रेटर नोएडा बेहाल, सड़कें बनीं तालाब, उद्योग जलमग्न; थीम पार्क नहीं, पहले मूलभूत सुविधाएँ दें – अमित कुमार उपाध्याय

ग्रेटर नोएडा:इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA) के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ज़रा सी बारिश होते ही ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक एवं आवासीय क्षेत्रों की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाती है। विशेष रूप से ईकोटेक-3 औद्योगिक क्षेत्र विगत कई वर्षों से भीषण जलभराव की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी प्राधिकरण के दावे पहली बारिश में ही धराशायी हो गए।

उन्होंने कहा कि थोड़ी देर की बारिश में ही सड़कें तालाब बन जाती हैं, घुटनों तक पानी भर जाता है, फैक्ट्रियों में पानी घुस जाता है, मशीनें, कच्चा माल और तैयार उत्पाद प्रभावित होते हैं। हजारों श्रमिक, कर्मचारी और उद्यमी जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। मालवाहक वाहन फँस जाते हैं, उत्पादन प्रभावित होता है और टूटी सड़कों व गड्ढों के कारण दुर्घटनाएँ आम हो चुकी हैं।

अमित कुमार उपाध्याय ने कहा कि हर वर्ष बारिश से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं—ड्रेनेज सुधर रहा है, नालों की सफाई हो रही है, निर्माण कार्य चल रहे हैं और इस बार जलभराव नहीं होगा। लेकिन पहली ही बारिश इन सभी दावों की सच्चाई उजागर कर देती है।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों में सड़क, जलनिकासी, स्ट्रीट लाइट और साफ़ ड्रेन जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं, तब करोड़ों रुपये थीम पार्क, सौंदर्यीकरण और अन्य गैर-प्राथमिकता वाली परियोजनाओं पर खर्च करने की क्या आवश्यकता है? विकास की शुरुआत बुनियादी सुविधाओं से होती है, न कि केवल दिखावटी परियोजनाओं से।
उन्होंने कहा कि उद्यमी लीज़ रेंट, ट्रांसफर चार्ज और अन्य शुल्कों के माध्यम से प्राधिकरण के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यह उद्यमियों और आम नागरिकों की मेहनत की कमाई है। इसलिए सबसे पहले उन्हें सुरक्षित सड़कें, प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था, नियमित नाला सफाई, बेहतर स्ट्रीट लाइट और गुणवत्तापूर्ण आधारभूत सुविधाएँ मिलनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी अनेक औद्योगिक क्षेत्रों में ड्रेनेज व्यवस्था अधूरी है। जहाँ नाले बने हैं, वहाँ वर्षों से समुचित सफाई नहीं हुई है। परिणामस्वरूप हर वर्ष उद्योगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और उत्पादन प्रभावित होता है।

उन्होंने कहा कि एक ओर देश ‘विकसित भारत-2047’, ‘ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ और वैश्विक निवेश की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यदि निवेशकों को पहली ही बारिश में जलमग्न सड़कें, फैक्ट्रियों में भरा पानी और बदहाल आधारभूत ढाँचा दिखाई देगा, तो निवेश का विश्वास कैसे बनेगा?
इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA) की ओर से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से मांग की जाती है कि जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान हेतु समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए, सभी नालों की तत्काल सफाई कराई जाए, क्षतिग्रस्त सड़कों का पुनर्निर्माण किया जाए, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था दुरुस्त की जाए तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA) गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय कहा कि “उद्यमियों को अब आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए। उद्योग सुरक्षित रहेंगे, तभी निवेश आएगा, रोजगार बढ़ेगा और विकसित भारत का सपना साकार होगा। अब समय आ गया है कि प्राधिकरण दिखावटी विकास नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला विकास करे।”
रिपोर्टर भगवत प्रसाद शर्मा






