शारदा विश्वविद्यालय में विश्व खाद्य दिवस पर सतत पोषण और खाद्य सुरक्षा पर हुआ मंथन
AFSTI दिल्ली चैप्टर की ट्रेजरर डॉ. विपाशा तनेजा ने खाद्य सुरक्षा, नवाचार और सतत विकास पर साझा किए विचार

ग्रेटर नोएडा: शारदा विश्वविद्यालय के शारदा स्कूल ऑफ बायो-साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के आहार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से विश्व आहार दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को सुरक्षित, पौष्टिक और टिकाऊ भोजन के महत्व के प्रति जागरूक करना और भविष्य के लिए बेहतर आहार व्यवस्था विकसित करने की दिशा में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना रहा। इस वर्ष की थीम “आज नवाचार, कल पोषण” के माध्यम से इस बात पर जोर दिया गया कि बेहतर तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान के मेल से आहार सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है। विद्यार्थियों ने पोस्टर मेकिंग और रंगोली के जरिए अच्छे खानपान और भोजन की बर्बादी रोकने का संदेश दिया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. विपाशा तनेजा, ट्रेजरर, AFSTI दिल्ली चैप्टर एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, उपस्थित रहीं। उन्होंने छात्रों को वैज्ञानिक अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पारंपरिक कृषि ज्ञान के समन्वय के माध्यम से भविष्य की खाद्य चुनौतियों का समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने और भोजन के उत्पादन में सुधार लाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके साथ ही, भोजन की बर्बादी को कम करने, बेहतर भंडारण एवं पैकेजिंग तकनीकों को अपनाने और भोजन की आपूर्ति श्रृंखला में आधुनिक तकनीक के उपयोग की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित तकनीकों के माध्यम से भोजन के उत्पादन एवं प्रसंस्करण को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया।

अपने संबोधन में डॉ. विपाशा तनेजा ने कहा कि “भविष्य की खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन बढ़ाने से सुनिश्चित नहीं होगी, बल्कि इसके लिए हमें नवाचार, विज्ञान और स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करना होगा। खाद्य अपव्यय को कम करने, पोषण-संपन्न खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के विकास में युवाओं और शोधकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। ‘Innovate Today, Nourish Tomorrow’ केवल एक थीम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। भोजन केवल हमारी बुनियादी जरूरत नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और बेहतर जीवन की नींव है। जब हम भोजन की गुणवत्ता, उसकी सुरक्षा और उसकी उपलब्धता को प्राथमिकता देते हैं, तभी एक स्वस्थ समाज की दिशा में आगे बढ़ पाते हैं।”
शारदा स्कूल ऑफ बायो-साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. अमित कुमार सिंह ने कहा “आहार सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल किसानों या खाद्य उद्योग तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों, संस्थानों, नीति-निर्माताओं और आम लोगों की साझा भागीदारी से ही ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है, जो आज की जरूरतों को पूरा करने के साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी सुरक्षित रखे। शारदा विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। खाद्य सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित करना केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि मानवता के बेहतर भविष्य की बुनियाद है।”
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि स्थानीय कृषि परंपराओं और आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों को साथ लेकर चलना समय की जरूरत है। इससे न केवल किसानों को लाभ मिल सकता है, बल्कि भोजन के उत्पादन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में भी मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु संयोजक प्रो. पीतम चंद्र, सह-संयोजक डॉ. रंजना पांडे एवं डॉ. दिनकर बी. कांबले तथा आयोजन समिति के सभी समन्वयकों के प्रयासों की सराहना की गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।






