बिलासपुर में भागवत कथा के दौरान सुनाया गोवर्धन पूजा का प्रसंग
श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से सुनी भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं

बिलासपुर: बिलासपुर स्थित श्रीबालाजी संकटमोचन हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथावाचक आचार्य गोपाल कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं गोवर्धन पूजा का प्रसंग विस्तार से सुनाया। कथा के दौरान उन्होंने गोवर्धन पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को प्रकृति, गौवंश और गोवर्धन पर्वत के प्रति कृतज्ञता का भाव रखने का संदेश दिया।
आचार्य गोपाल कृष्ण शास्त्री ने बताया कि जब ब्रजवासी भगवान इंद्र की पूजा की तैयारी कर रहे थे, तब बाल स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें इंद्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। श्रीकृष्ण ने समझाया कि गोवर्धन पर्वत ब्रजवासियों को वन, जल, चारा और गौवंश के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करता है। इसके बाद ब्रजवासियों ने श्रद्धा के साथ गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव मनाया।
कथा में आगे बताया गया कि भगवान इंद्र ने अपने अपमान से क्रोधित होकर ब्रज में मूसलाधार वर्षा कर दी। लगातार वर्षा से ब्रजवासी भयभीत हो गए। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर सभी ब्रजवासियों और पशुधन को उसके नीचे आश्रय दिया। सात दिनों तक भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की। अंत में इंद्र को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा स्वीकार की।
कथावाचक ने कहा कि गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति के संरक्षण, गौसेवा, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और अहंकार का त्याग करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ प्रकृति एवं जीव-जंतुओं की सेवा करने का आह्वान किया।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन का आनंद लिया और भगवान की कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
रिपोर्टर घनश्याम पाल






