दनकौर

बी.एड. प्रथम वर्ष के नवप्रवेशित प्रशिक्षणार्थियों हेतु अभिविन्यास कार्यक्रम का आयोजन

दनकौर:श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज, दनकौर, गौतम बुद्ध नगर के शिक्षक शिक्षा विभाग द्वारा बी.एड. प्रथम वर्ष के नवप्रवेशित प्रशिक्षणार्थियों के लिए Orientation Programme (अभिविन्यास कार्यक्रम) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षणार्थियों को महाविद्यालय एवं विभाग की शैक्षणिक व्यवस्था, बी.एड. पाठ्यक्रम, प्रायोगिक कार्य, इंटर्नशिप, आंतरिक मूल्यांकन, अनुशासन तथा शिक्षक-प्रशिक्षण की विभिन्न प्रक्रियाओं से परिचित कराना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने नवप्रवेशित प्रशिक्षणार्थियों का स्वागत करते हुए शिक्षक शिक्षा विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों एवं महाविद्यालय में संचालित शिक्षक-प्रशिक्षण व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बी.एड. प्रशिक्षणार्थियों के लिए यह अवसर अपने ज्ञान, व्यक्तित्व एवं शिक्षण-कौशल को विकसित करने का महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपराओं एवं अनुशासन का पालन करते हुए नियमित रूप से शिक्षण गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

महाविद्यालय की उप-प्राचार्या एवं आईकयूएसी समन्वयक के डॉ. रश्मि गुप्ता ने नवप्रवेशित प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी को अपने व्यवहार, विचार एवं कार्यों में जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को अपने शैक्षणिक जीवन में अनुशासन, नियमितता एवं निरंतर सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष डॉ. रश्मि जहाँ के स्वागत एवं संबोधन से हुआ। उन्होंने नवप्रवेशित प्रशिक्षणार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि बी.एड. केवल एक उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक कुशल, संवेदनशील, जिम्मेदार एवं प्रभावी शिक्षक बनने की सतत प्रक्रिया है।

डॉ. सूर्य प्रताप राघव ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल विषय-ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षणार्थियों में नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना भी है।

डॉ. प्रशांत कनौजिया ने बी.एड. पाठ्यक्रम एवं विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि एक प्रभावी शिक्षक के लिए विषय-ज्ञान के साथ-साथ शिक्षण-कौशल, प्रभावी संप्रेषण तथा व्यावहारिक दक्षताओं का विकास भी आवश्यक है।

डॉ. राजीव पांडे (पिंटू) ने प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन में मिलने वाले प्रत्येक अवसर का सकारात्मक उपयोग करना चाहिए। डॉ. कोकिल अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका निरंतर परिवर्तित हो रही है। आधुनिक शिक्षक के लिए तकनीकी ज्ञान, रचनात्मकता, संवेदनशीलता एवं नवाचार की समझ आवश्यक है।

कार्यक्रम के समापन पर सभी नवप्रवेशित प्रशिक्षणार्थियों को उनके उज्ज्वल शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी गईं।

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