बुलन्दशहर

नमामि भारतम्’ : वन्दे मातरम् के 150वें वर्ष पर बुलंदशहर में गूंजा राष्ट्रस्वर

बुलंदशहर :भारत की राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और मातृभूमि के प्रति अगाध श्रद्धा के अमर गीत ‘वन्दे मातरम्’ के गौरवशाली 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के मार्गदर्शन में देशव्यापी सामूहिक गायन कार्यक्रम ‘नमामि भारतम्’ का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रव्यापी श्रृंखला के तहत प्रातः 11:00 बजे विवेकानंद सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलिज डी0एम0 रोड बुलंदशहर में एक भव्य एवं ऐतिहासिक सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस ऐतिहासिक आयोजन के तहत आज देश भर के 25,000 से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से अधिक विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक तथा समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिक एक समय एक स्वर और एक लय में सम्पूर्ण ‘वन्दे मातरम्’ का सामूहिक गायन कराया गया। इस राष्ट्र-उत्सव का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को ‘वन्दे मातरम्’ की ऐतिहासिक यात्रा, उसके राष्ट्रीय महत्व और स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणादायी विरासत से जोड़ना है।

एक स्वर – एक संकल्प – एक भारत: ‘नमामि भारतम्’ के माध्यम से विद्यालय में राष्ट्रभाव, मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, सांस्कृतिक एकात्मता और राष्ट्रीय चेतना की अभूतपूर्व अभिव्यक्ति होगी। सामूहिक गायन के साथ-साथ वन्दे मातरम् की ऐतिहासिक यात्रा पर आधारित विशेष परिचर्चा, प्रदर्शनी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर विद्यालय के व्यवस्थापक एवं सह मंत्री भारतीय शिक्षा समिति संदीप त्यागी ने संविधान सभा और राष्ट्रीय गीत का सम्मान करते हुए बताया कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद ‘वन्दे मातरम्’ को राष्ट्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक चेतना में विशिष्ट स्थान प्रदान किया गया। संविधान सभा में इसके सम्मान और राष्ट्रीय महत्व को स्वीकार करते हुए इसे राष्ट्रीय गीत का गौरव प्रदान किया गया था। आज ‘जन गण मन’ (राष्ट्रीय गान) और ‘वन्दे मातरम्’ (राष्ट्रीय गीत) भारत की राष्ट्रीय पहचान के दो सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। इसके 150 वर्ष पूर्ण होने पर पूर्ण वन्दे मातरम् (6 छंद) का गायन किया गया।

नई पीढ़ी तक पहुंचेगा स्वतंत्रता संग्राम का संदेश

विद्यालय के अध्यक्ष सुधीर गुप्ता ने बताया कि नई पीढ़ी तक पहुंचेगी स्वतंत्रता संग्राम का संदेश ‘नमामि भारतम्’ का प्रमुख ध्येय यह है कि आज का विद्यार्थी ‘वन्दे मातरम्’ को केवल एक गीत के रूप में न जाने, बल्कि उसके पीछे निहित स्वतंत्रता, आत्मसम्मान, मातृभूमि-प्रेम, त्याग, एकता और राष्ट्रीय चेतना के गौरवशाली इतिहास को भी आत्मसात करे। इस अवसर पर विद्यार्थियों को वन्दे मातरम् की रचना, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी ऐतिहासिक भूमिका तथा राष्ट्रीय गीत के रूप में इसके महात्म्य से परिचित कराया।

देश की विविधता में एकता का विराट दृश्य

आज प्रातः जब निर्धारित समय पर देश के हजारों विद्यालयों एवं संस्थानों में एक साथ ‘वन्दे मातरम्’ का स्वर गूंजा , तब यह आयोजन भारत की भौगोलिक, भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के बीच विद्यमान एकात्मता का व्यापक प्रतीक बना । देश के अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक और नागरिक अपनी-अपनी स्थानीय परिस्थितियों में सहभागी होते हुए एक ही समय पर एक ही राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन किया । यह दृश्य इस विचार को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करता है कि भारत की असली शक्ति उसकी विविधता के साथ-साथ उसकी सांस्कृतिक एकात्मता में भी निहित है।

‘नमामि भारतम्’ का संदेश

‘नमामि भारतम्’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का राष्ट्रव्यापी जन-सहभागिता अभियान है। आज 25 सितंबर 2026 को प्रातः 11 बजे जब देश के 25,000 से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से अधिक कंठों से “वन्दे मातरम्…” गूंजा है , और 150 वर्षों की राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता-संघर्ष की स्मृति और भारत की सांस्कृतिक एकात्मता को नमन करने हेतु एक अभूतपूर्व प्रयास किया है।

विद्यालय के प्रधानाचार्य राजकुमार वर्मा एवं प्रबंध समिति और नगर के सभी गणमान्य नागरिकों, बुद्धिजीवियों, शिक्षक और विद्यार्थियों से इस ऐतिहासिक एवं गौरवशाली राष्ट्र-उत्सव में शामिल हुए ।

रिपोर्ट – संजय गोयल सह संपादक ग्लोबल न्यूज़ 24×7

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