दनकौर

श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज में “आज़ादी के संघर्ष में महिलाओं का योगदान” विषय पर पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता आयोजित

दनकौर: श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज, दनकौर, ग्रेटर नोएडा के कला संकाय के इतिहास विभाग द्वारा स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में “आज़ादी के संघर्ष में महिलाओं का योगदान” विषय पर पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता का आयोजन 14 अगस्त 2026 को दोपहर 1:00 बजे से एकलव्य सभागार में किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराना तथा उनके साहस, त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति से नई पीढ़ी को प्रेरित करना रहा।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के सचिव रजनीकान्त अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपप्राचार्या एवं आई.क्यू.ए.सी. समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता ने की। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में कला संकायाध्यक्ष डॉ. देवानंद सिंह, डॉ. शशि, डॉ. प्रशांत कन्नौजिया एवं डॉ. रेशा शामिल रहे। कार्यक्रम की संयोजिका इतिहास विभाग की आचार्या डॉ. नाज परवीन रहीं। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं कर्मचारीगण की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने आकर्षक, रचनात्मक एवं तथ्यपरक पोस्टरों के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगनाओं के योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। पोस्टरों में रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हजरत महल, सरोजिनी नायडू, कस्तूरबा गांधी, कमला नेहरू, अरुणा आसफ अली, उषा मेहता, कैप्टन लक्ष्मी सहगल, सरस्वती राजामणि, मैडम भीकाजी कामा एवं सुचेता कृपलानी सहित अनेक महिला स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण को दर्शाया गया।

विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि भारत की स्वतंत्रता केवल पुरुष नेताओं के संघर्ष का परिणाम नहीं थी, बल्कि महिलाओं की सक्रिय, साहसिक एवं निर्णायक भागीदारी ने भी स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन और नई ऊर्जा प्रदान की। महिलाओं ने सत्याग्रह, विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार, क्रांतिकारी गतिविधियों, भूमिगत आंदोलनों, गुप्तचर कार्यों तथा आजाद हिंद फौज जैसी विभिन्न गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रतियोगिता का एक विशेष आकर्षण कैप्टन लक्ष्मी सहगल एवं सरस्वती राजामणि जैसी अपेक्षाकृत कम चर्चित वीरांगनाओं के योगदान की प्रस्तुति रही। विद्यार्थियों ने इनके जीवन एवं संघर्ष को पोस्टरों तथा मौखिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सामने लाकर स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के उन पक्षों को उजागर करने का सार्थक प्रयास किया, जिन पर सामान्यतः कम चर्चा होती है।

कार्यक्रम के दौरान पायल भाटी, अंजलि, मुस्कान, मुस्कुराना, दीपांशी, सोफिया, नाजिश, अंशु कबीरा एवं फिजा जायसवाल सहित अनेक विद्यार्थियों ने प्रभावशाली भाषण एवं प्रस्तुतियाँ दीं। उनकी प्रस्तुतियों ने उपस्थित निर्णायक मंडल एवं शिक्षकों को प्रभावित किया। विद्यार्थियों ने अपने संदेश के माध्यम से कहा कि“नारी केवल इतिहास की साक्षी नहीं, बल्कि इतिहास की निर्माता भी रही है।”

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने न केवल ऐतिहासिक तथ्यों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का अध्ययन किया, बल्कि शोध, रचनात्मक अभिव्यक्ति, प्रस्तुतीकरण एवं सार्वजनिक वक्तव्य जैसे कौशलों का भी प्रभावी प्रदर्शन किया। इस आयोजन ने विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, ऐतिहासिक चेतना तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को और सुदृढ़ किया।

प्रतियोगिता में प्रथम स्थान ज्योति, द्वितीय स्थान हर्ष मलिक तथा तृतीय स्थान मुन्नी, रिम्शा एवं प्रिया नागर ने प्राप्त किया। वहीं सांत्वना पुरस्कार नाजिश, रश्मि एवं अंशु कबीरा को प्रदान किया गया। विजेता एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों को ट्रॉफी, मेडल एवं प्रमाण-पत्र मुख्य अतिथि सचिव श्री रजनीकान्त अग्रवाल एवं उपप्राचार्या एवं आई.क्यू.ए.सी. समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता द्वारा प्रदान कर सम्मानित किया गया। अतिथियों एवं निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों के रचनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया।

लगभग 70 विद्यार्थियों की उपस्थिति वाले इस कार्यक्रम में करीब 50 छात्र-छात्राओं ने प्रतियोगिता में सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय परिवार ने स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगनाओं के अदम्य साहस, त्याग एवं राष्ट्रभक्ति को नमन करते हुए विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय एवं सकारात्मक भूमिका निभाएँ।

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