साहित्य जगत

वैश्विक साहित्यिक पटल पर डॉ. भगवत प्रसाद शर्मा का भावपूर्ण एकल काव्य-पाठ

राष्ट्रचेतना, मातृशक्ति और भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता के स्वर से गुंजायमान हुआ साहित्यिक मंच

ग्रेटर नोएडा  सर्वभाषाओं के संवर्धन, संरक्षण एवं उन्नयन को समर्पित अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के वैश्विक साहित्यिक पटल पर प्रतिष्ठित कवि डॉ. भगवत प्रसाद शर्मा ने अपने ओजस्वी एवं भावप्रवण एकल काव्य-पाठ से देश-विदेश के साहित्यप्रेमियों को भावविभोर कर दिया। उनकी काव्याभिव्यक्ति में राष्ट्रभक्ति, मातृभूमि के प्रति अगाध अनुराग, वीर शहीदों के प्रति कृतज्ञ नमन, मातृशक्ति का गौरव तथा भारतीय संस्कृति की सनातन चेतना का प्रभावशाली समन्वय दिखाई दिया।

अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के संस्थापक प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं ‘प्रज्ञान पुरुष’ पंडित सुरेश नीरव जी हैं। यह संस्था विविध भारतीय एवं वैश्विक भाषाओं के मध्य साहित्यिक समन्वय, सांस्कृतिक संवाद और भाषायी सौहार्द को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर सक्रिय है। संस्था द्वारा हिंदी की बहुराष्ट्रीय साहित्यिक पत्रिका ‘प्रज्ञान विश्वम्’ का प्रकाशन भी किया जाता है।

इस वैश्विक साहित्यिक आयोजन में अमेरिका से अन्नदा पाटनी जी, सुभाष चंद्र लखेड़ा जी, डॉ. कौशलेंद्र टिंगी जी एवं वीणा सिन्हा जी, कुवैत से संगीता चौबे ‘पंखुड़ी’ जी, नीदरलैंड्स से विश्वास दुबे जी, लंदन से आशीष मिश्रा जी, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. भावना कुँवर जी एवं प्रगीत कुँवर जी सहित अनेक साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की। भारत से पंडित सुरेश नीरव जी, मधु मिश्रा जी, विनोद भृंग जी, सेठ सोहनलाल खंडेलवाल जी, सुभाष चंद्र सैनी जी, विमल बहुगुणा जी, दया सिन्हा जी, बोधिसत्व कस्तूरिया जी, ब्रह्म देव शर्मा जी, बबीता प्रसाद प्राची जी, कविता सक्सेना जी, सोनिया गोस्वामी शर्मा जी, प्रमिला श्री तिवारी जी, के.पी. चौहान जी, निधि मद्धेशिया जी, जग नारायण मिश्रा जी एवं सुनीता माहेश्वरी जी सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।

डॉ. भगवत प्रसाद शर्मा ने सर्वप्रथम माँ सरस्वती की वंदना कर ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री शक्ति को नमन किया। इसके पश्चात माँ भारती के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्होंने राष्ट्रभक्ति से अनुप्राणित काव्य-पाठ का शुभारंभ किया—

“मस्तक तिलक लगाऊँ अपने माटी हिंदुस्तान की,

पुण्य धरा ये पावन भूमि, वीरों के बलिदान की।”

वीर शहीदों की अमर गाथा को नमन करते हुए उन्होंने भावपूर्ण स्वर में कहा—

“भारत माँ के बेटों का यशगान सुनाने आया हूँ,

भारत माँ के चरणों में, मैं शीश झुकाने आया हूँ।”

मातृशक्ति के त्याग, सृजन और गौरव को स्वर देते हुए उन्होंने कहा—

“करती हो मंगल चार तुम्हीं, बिगड़ा घर तुम्हीं बनाती हो,

है अकथनीय गाथा तुमरी, तुम देश की ज्योति जगाती हो।”

डॉ. शर्मा ने युवाशक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति की महान परंपराओं, जीवन-मूल्यों और ज्ञान-विधाओं को आत्मसात कर विश्वपटल पर राष्ट्र की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को और अधिक प्रतिष्ठित करे। उन्होंने भारतीय संस्कृति को केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान को दिशा देने वाली और भविष्य को आलोकित करने वाली जीवंत चेतना बताया।

काव्य-पाठ के समापन पर डॉ. शर्मा ने पंडित सुरेश नीरव जी, अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति तथा देश-विदेश के समस्त साहित्यकारों एवं श्रोताओं के प्रति हृदय की गहराइयों से कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस गौरवपूर्ण साहित्यिक मंच पर काव्य-पाठ का अवसर और श्रोताओं का स्नेह उनके लिए अविस्मरणीय रहेगा।

डॉ. शर्मा ने भविष्य में पुनः इस वैश्विक साहित्यिक परिवार के मध्य आत्मीय साहित्यिक संवाद की आशा व्यक्त करते हुए सभी के प्रति सादर प्रणाम, नमन एवं अभिनंदन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साहित्य, भाषा और संस्कृति की यह पुण्य यात्रा इसी प्रकार निरंतर गतिमान रहे।

 

 

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