ग्रेटर नोएडा

भारत में फॉरेंसिक ओडोंटोलॉजी के बढ़ते क्षेत्र को शारदा यूनिवर्सिटी में मिला वैश्विक मंच

ग्रेटर नोएडा: शारदा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज की ओर से “फॉरेंसिक ओडोंटोलॉजी में नवीनतम रुझान एवं तकनीक” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय आमंत्रित व्याख्यान आयोजित किया गया था। इसमें पेरिस की प्रतिष्ठित फॉरेंसिक ओडोंटोलॉजिस्ट डॉ. आइदा बेन चेख ने विशेषज्ञ के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। डॉ. आइदा फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट ऑफ पेरिस में पहचान एवं ट्रॉमेटोलॉजी की विशेषज्ञ हैं। वह नेशनल साइंटिफिक पुलिस सर्विस में सुपरिंटेंडेंट के रूप में भी कार्य करती हैं और एसडब्ल्यूजी डीवीआई इंटरपोल की सदस्य हैं।

फॉरेंसिक ओडोंटोलॉजी, जिसे डेंटल फॉरेंसिक्स भी कहा जाता है, दंत चिकित्सा की एक विशेष शाखा है, जिसमें दांतों से जुड़े वैज्ञानिक ज्ञान का इस्तेमाल कानूनी और फॉरेंसिक जांच में किया जाता है। आपराधिक मामलों और आपदा पीड़ितों की पहचान में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जहां दांतों, बाइट मार्क्स और मुंह से जुड़ी संरचनाओं का अध्ययन कर व्यक्ति की पहचान स्थापित करने और चोट से जुड़े साक्ष्यों को समझने में मदद मिलती है। दुनियाभर में महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस क्षेत्र को भारत में भी तेजी से पहचान मिल रही है। कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और मेडिको-लीगल जांच में फॉरेंसिक विशेषज्ञता की बढ़ती जरूरत के साथ युवा डेंटल प्रोफेशनल्स के लिए इस क्षेत्र में नए अवसर भी सामने आ रहे हैं।

डॉ. आइदा ने अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभव और विशेषज्ञता को विद्यार्थियों के साथ साझा करते हुए उन्हें फॉरेंसिक साइंसेज के क्षेत्र में बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस क्षेत्र में हो रहे बदलावों, नई तकनीकों और शोध की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों के शोध कार्य की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “मैं विद्यार्थियों के उत्साह और उनके शोध कार्य को देखकर बेहद प्रभावित हुई। खास तौर पर यह देखकर खुशी हुई कि बीडीएस के विद्यार्थी स्नातक स्तर पर रहते हुए भी शोध पत्र प्रकाशित कर रहे हैं। फॉरेंसिक ओडोंटोलॉजी ऐसा क्षेत्र है, जहां दंत चिकित्सा के ज्ञान का इस्तेमाल पहचान और जांच में किया जाता है। विद्यार्थियों को नई तकनीकों को सीखने के साथ-साथ शोध और व्यावहारिक अनुभव पर लगातार ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए तैयार करेगा।”

इस सत्र का समन्वय शारदा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज की फॉरेंसिक ओडोंटोलॉजी यूनिट की प्रभारी डॉ. पारुल खरे ने किया था। डॉ. आइदा का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास हमेशा से विद्यार्थियों की अकादमिक पढ़ाई के साथ शोध और व्यावहारिक अनुभव को जोड़ना रहा है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ संवाद से विद्यार्थियों को अपने विषय को एक नए नजरिए से समझने का अवसर मिलता है। डॉ. आइदा का अनुभव हमारे विद्यार्थियों के लिए बेहद प्रेरणादायक रहा और इससे शोध के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ा।” कार्यक्रम में विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट, पोस्टर और शोध पत्र भी प्रदर्शित किए गए थे। डॉ. आइदा ने शारदा यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के अकादमिक स्तर और शोध कार्य की सराहना की तथा इस बात पर विशेष खुशी जताई कि यहां बीडीएस स्तर के विद्यार्थी भी प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में इंडेक्स्ड शोध पत्र प्रकाशित कर रहे हैं।

इस अंतरराष्ट्रीय सहभागिता ने फॉरेंसिक साइंसेज के क्षेत्र को आगे बढ़ाने और युवा शोधकर्ताओं को फॉरेंसिक ओडोंटोलॉजी के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में सार्थक योगदान के लिए प्रेरित करने के प्रति शारदा यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता को सामने रखा। भारत में न्याय व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में फॉरेंसिक विशेषज्ञता की अहमियत लगातार बढ़ रही है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय अकादमिक संवाद और सहयोग भारत में फॉरेंसिक ओडोंटोलॉजी के विकास के साथ-साथ इस क्षेत्र के भविष्य को आकार देने में देश की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाते हैं।

इस मौके पर फैकल्टी मेंबर, स्टूडेंट्स आदि मौजूद रहे।

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