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बाराही मेला–2026: सूरजपुर में सजी संस्कृति, सुर और साहित्य की भव्य महफ़िल 

बाराही मेला–2026: परंपरा, कविता और संगीत से सराबोर हुई सूरजपुर की शाम

सूरजपुर: ऐतिहासिक बाराही मेला–2026 इस वर्ष भारतीय लोकजीवन, सांस्कृतिक परंपराओं, साहित्यिक अभिव्यक्ति और सुर-साधना का एक अद्वितीय उत्सव बनकर उभरा है। शनिवार की सायंकालीन बेला इस महोत्सव का सर्वाधिक भावपूर्ण एवं स्मरणीय अध्याय सिद्ध हुई, जब फिल्मी गीतों, काव्य संध्या एवं पारंपरिक चौपाल की सजीव प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण प्रख्यात गीतकार ‘गीत ऋषि’ संतोष आनंद रहे। उनके द्वारा प्रस्तुत अमर गीत “एक प्यार का नगमा है…” की मधुर स्वर-लहरियों ने वातावरण को भावनाओं से सराबोर कर दिया। सम्पूर्ण पंडाल एकस्वर होकर उनके साथ गुनगुनाता रहा, मानो समय स्वयं ठहर गया हो।

काव्य संध्या में विविध रसों की मनोहारी छटा देखने को मिली। कवि अक्षय शर्मा ने अपने दार्शनिक गीतों से जीवन के गूढ़ सत्य को उद्घाटित किया, वहीं कवि मुकेश शर्मा ने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से जीवन और क्रिकेट के रोचक साम्य को प्रस्तुत कर श्रोताओं को आनंदित किया। कवि दीपक सैनी ने समसामयिक विषयों पर मिमिक्री एवं काव्य का प्रभावी समन्वय कर वातावरण को उल्लासमय बना दिया। कवि वैभव शर्मा, भगवत शर्मा एवं अमित शर्मा ने भी अपने सशक्त काव्य-पाठ से कार्यक्रम को ऊर्जस्वित बनाए रखा। कवयित्री शिखा दीप्ति की मार्मिक ग़ज़लों ने श्रोताओं के अंतर्मन को स्पर्श किया, वहीं भगवत प्रसाद शर्मा ने अपने ओजस्वी काव्य के माध्यम से वीर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अन्नू पहलवान, मोनिका नागर, पूजा भाटी, अमित गुर्जर एवं मुस्कान की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा को और बढ़ाया। शिव मंदिर सेवा समिति द्वारा सभी अतिथियों एवं कलाकारों का माल्यार्पण एवं स्मृति-चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया गया।

मेले का एक विशिष्ट आकर्षण पारंपरिक ‘चौपाल’ रही, जिसने ग्राम्य जीवन की आत्मा को मूर्त रूप प्रदान किया। फूंस, बांस एवं पारंपरिक सामग्री से निर्मित यह चौपाल न केवल स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण रही, अपितु नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुई। विशाल खाट, हुक्का, बैलगाड़ी, प्राचीन कुआं एवं पीपल वृक्ष ने इस परिवेश को पूर्णतः ग्रामीण सौंदर्य से अभिसिंचित कर दिया।

आगामी 13 अप्रैल को आयोजित होने वाला विशाल इनामी कुश्ती दंगल मेले का अगला प्रमुख आकर्षण होगा, जिसमें देशभर के ख्यातिप्राप्त पहलवान अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

बाराही मेला–2026 यह सिद्ध करता है कि जब संगीत, साहित्य और परंपरा एक सूत्र में पिरोए जाते हैं, तब वह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और विरासत संरक्षण का सशक्त आयाम बन जाता है।

रिपोर्ट-भगवत प्रसाद शर्मा

 

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