श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज में “पहल–एक नई सोच” अभिभावक–शिक्षक सम्मेलन का आयोजन

दनकौर: श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर में आज रजनीकान्त अग्रवाल, सचिव एवं डॉ. गिरीश कुमार वत्स, प्राचार्य के दिशा-निर्देशन में “पहल–एक नई सोच” अभिभावक–शिक्षक सम्मेलन का आयोजन किया गया। बी.एससी., वाणिज्य, बी.बी.ए./बी.सी.ए. एवं बी.एड. विभागों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, नियमित उपस्थिति, अनुशासन एवं सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावकों और शिक्षकों के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना रहा। 
कार्यक्रम का शुभारंभ रजनीकान्त अग्रवाल, डॉ. गिरीश कुमार वत्स, डॉ. रश्मि गुप्ता, उपप्राचार्या एवं आई.क्यू.ए.सी. समन्वयक, सुरेश चन्द्र एवं श्रीमती शारदा द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। मंच संचालन अमित नागर, विभागाध्यक्ष, विज्ञान संकाय ने किया।
महाविद्यालय का परिचय देते हुए डॉ. रश्मि गुप्ता ने महाविद्यालय की 29 वर्षों की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय श्री वेद प्रकाश अग्रवाल जी ने क्षेत्र में, विशेषकर बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस महाविद्यालय की स्थापना का सपना देखा था। उन्होंने कहा कि स्थापना के समय लगाया गया छोटा-सा पौधा आज वटवृक्ष का रूप ले चुका है। उन्होंने वर्तमान प्रबंध समिति—अध्यक्ष राकेश कुमार गर्ग, सचिव रजनीकान्त अग्रवाल एवं कोषाध्यक्ष मनीष कुमार अग्रवाल—तथा प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स के नेतृत्व में महाविद्यालय की प्रगति का उल्लेख किया।
डॉ. रश्मि गुप्ता ने कहा, “जब अभिभावक और शिक्षक एक साथ विद्यार्थी के भविष्य को दिशा देते हैं, तब शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संस्कार, व्यक्तित्व एवं जीवन-निर्माण का सशक्त माध्यम बन जाती है।” उन्होंने पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से अभिभावकों को महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों, विभिन्न विभागों, उपलब्ध सुविधाओं, विद्यार्थियों की उपलब्धियों एवं विकास यात्रा से अवगत कराया। अभिभावकों ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए महाविद्यालय की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की।
अमित नागर ने कहा कि “पहल–एक नई सोच” का उद्देश्य महाविद्यालय की कार्यप्रणाली को अधिक सुचारू, संगठित एवं अनुशासित बनाने के साथ-साथ अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित करना है। इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंध समिति की ओर से अभिभावकों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
सचिव रजनीकान्त अग्रवाल ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए महाविद्यालय और अभिभावकों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों के विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, लेकिन इन प्रयासों की सफलता अभिभावकों के सहयोग एवं शिक्षकों के साथ उनके समन्वय पर भी निर्भर करती है।
प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने अभिभावकों से विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, अध्ययन, अनुशासन एवं सकारात्मक व्यवहार पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने अभिभावकों से विद्यार्थियों की महाविद्यालयीन गतिविधियों के प्रति जागरूक रहने तथा मोबाइल फोन के उपयोग पर विशेष निगरानी रखने की अपील की, ताकि विद्यार्थी इसका सदुपयोग करें और किसी नकारात्मक प्रभाव से बचें।
सम्मेलन के दौरान शिक्षकों एवं अभिभावकों के बीच विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, उपस्थिति, अनुशासन, व्यवहार एवं अध्ययन की आदतों को लेकर सार्थक संवाद हुआ। अभिभावकों ने अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए। सूरज सोलंकी ने कहा कि विद्यार्थियों की गतिविधियों की जानकारी अभिभावकों को भी होनी चाहिए। ऋषि राज शर्मा ने कहा कि बच्चे, अभिभावक एवं अध्यापक मिलकर कार्य करें तो निश्चित रूप से समाज का विकास होगा। सेवानिवृत्त शिक्षक श्री सुरेश चन्द्र ने बताया कि उनके दो बच्चों ने इसी महाविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर शिक्षक के रूप में सफलता हासिल की है। डॉ. एन.सी. शर्मा ने कहा कि अन्य विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद उन्होंने महाविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित होकर अपनी बेटी का प्रवेश इसी संस्थान में कराया। बृजपाल सिंह ने शिक्षकों के मित्रवत व्यवहार, श्रीमती राधा ने शिक्षा व्यवस्था तथा लोकेश ने महाविद्यालय के अनुशासन की सराहना की।
कार्यक्रम में डॉ. देवानन्द सिंह, डॉ. प्रीति रानी सेन, श्रीमती शशि नागर, डॉ. रश्मि जहाँ, डॉ. कोकिल, डॉ. प्रशान्त कन्नौजिया, डॉ. राजीव उर्फ पिन्टू, डॉ. सूर्य प्रताप राघव, डॉ. नाज़ परवीन, श्रीमती प्रीति शर्मा, इन्द्रजीत सिंह, डॉ. संगीता रावल, डॉ. रेशा, महींपाल सिंह, कु. चारू सिंह, कु. काजल कपासिया, श्रीमती सुनीता शर्मा, कु. रूचि शर्मा, अखिल कुमार, प्रिन्स त्यागी, अजय कुमार, करन नागर, पुनीत कुमार गुप्ता, बिजेन्द्र सिंह, रामकिशन सिंह, विनीत कुमार, अंकित नागर, रनवीर सिंह, मीनू सिंह एवं ज्ञान प्रकाश सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों एवं छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही। संवाद के दौरान विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत प्रगति के लिए आगामी कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।
अंत में प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने सभी अभिभावकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। “पहल–एक नई सोच” सम्मेलन ने महाविद्यालय, शिक्षक एवं अभिभावकों के बीच पारस्परिक विश्वास, संवाद और सहयोग को मजबूत करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में एक सार्थक पहल का संदेश दिया।






