“बंजर धरा ने ओढ़ी हरित चुनरिया—‘श्री अरण्यम’ बना प्रकृति-संरक्षण और जनसंकल्प की अनुपम गाथा”
बंजर धरा से हरित धरोहर तक—‘श्री अरण्यम सिटी फॉरेस्ट’ बना प्रकृति-प्रेम और जनसहभागिता की अनुपम गाथा

नोएडा/गौतमबुद्धनगर:कभी जिस भूमि पर बंजरता का मौन पसरा था, आज वही धरा लगभग 8,000 वृक्षों की सघन हरितिमा से जीवन्त, स्पंदित और प्राणवान हो उठी है। यह परिवर्तन केवल पौधारोपण की कहानी नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदना, सामूहिक संकल्प, सतत श्रम और जनसहभागिता की ऐसी प्रेरणादायी गाथा है, जिसने उजाड़ धरती को हरित धरोहर में रूपांतरित कर दिया।
“एक बीज में वन का स्वप्न,
एक वृक्ष में जीवन-प्राण;
हरित रहे धरती का आँचल,
यही मानवता का पावन अभियान।”
नोएडा प्राधिकरण के सहयोग तथा आर्ट ऑफ लिविंग, नोएडा के समर्पित स्वयंसेवकों के अथक पुरुषार्थ से साकार हुआ ‘श्री अरण्यम सिटी फॉरेस्ट’ आज पर्यावरण-संरक्षण का जीवंत प्रतीक बन चुका है। यहाँ खड़े वृक्ष केवल हरियाली नहीं, बल्कि मानवता की आशाएँ, पक्षियों के आश्रय, धरती की साँसें और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संदेश हैं।
इसी हरित यात्रा को आगे बढ़ाते हुए रविवार, 23 अगस्त 2026 को प्रातः 8 से 10 बजे तक सेक्टर-50, नोएडा स्थित श्री अरण्यम सिटी फॉरेस्ट में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। आर्ट ऑफ लिविंग के सैकड़ों स्वयंसेवकों एवं पदाधिकारियों तथा आम नागरिकों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण कर पर्यावरण-संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। पूरे परिसर में सेवा-भाव, प्रकृति-प्रेम और हरित चेतना का अद्भुत संगम दिखाई दिया।
“युवा बनें प्रकृति के प्रहरी”—सविता शर्मा
कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग की संचालिका एवं कैलाश ग्रुप ऑफ होस्पिटल की डायरेक्टर सविता शर्मा ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि युवा केवल राष्ट्र के भविष्य के निर्माता नहीं, बल्कि प्रकृति के सजग प्रहरी भी हैं। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया छोटा-सा पौधा कल किसी बच्चे को छाया, किसी पक्षी को आश्रय और मानवता को प्राणवायु देगा। इसलिए पौधा लगाना ही नहीं, उसे वृक्ष बनने तक सहेजना हमारा दायित्व है।
उन्होंने युवाओं से अपने जन्मदिन और शुभ अवसरों पर पौधारोपण को जीवन-संस्कार बनाने तथा प्रत्येक पौधे की नियमित देखभाल का संकल्प लेने का आग्रह किया।
“युवा जागे तो वन मुस्काए,
धरती फिर से गीत सुनाए;
एक-एक हाथ बने हरित प्रहरी,
भारत हरित प्रभात सजाए।”
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि इन्दु जी, सरला जी एवं संजय जी ने भी पौधारोपण कर पर्यावरण-संरक्षण का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि वृक्ष धरती के मौन तपस्वी हैं—जो स्वयं धूप सहकर संसार को शीतल छाया, प्राणवायु और जीवन देते हैं।
कार्यक्रम का समापन अधिकाधिक पौधे लगाने तथा रोपे गए पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का सामूहिक संकल्प लेकर हुआ।
‘श्री अरण्यम’ केवल एक वन नहीं, बल्कि एक जीवंत विचार है—कि दृढ़ इच्छाशक्ति, सामूहिक पुरुषार्थ और प्रकृति के प्रति संवेदना से बंजर धरती को भी जीवनदायिनी हरित धरोहर में बदला जा सकता है।
“वृक्ष रहें तो प्राण रहें,
वृक्ष रहें तो साँस;
हरित धरा की गोद में,
सुरक्षित रहे विकास।”
-सविता शर्मा
डायरेक्टर कैलास ग्रुप ऑफ हास्पिटल (संचालिका आर्ट ऑफ लिविंग)


