नोएडा

नोएडा टैलेंट हंट में आर्या चौहान ने रचा सफलता का नया अध्याय, तीन पदक जीतकर बढ़ाया परिवार और विद्यालय का गौरव

माँ को मानती हैं अपना आदर्श, खेल को बनाया जीवन का अभिन्न अंग; आर्या की उपलब्धि बेटियों के अदम्य साहस, संकल्प और सामर्थ्य की प्रेरक गाथा

नोएडा: बेटियाँ जब अपने स्वप्नों को संकल्प की शक्ति, परिश्रम की साधना और आत्मविश्वास के संबल से साकार करने का प्रण लेती हैं, तब उनकी उपलब्धियाँ केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहतीं, अपितु सम्पूर्ण समाज के लिए प्रेरणापुंज बन जाती हैं। इसी प्रेरणादायी भावभूमि को चरितार्थ करते हुए सेक्टर-76 स्थित आम्रपाली सिलिकॉन सिटी निवासी 12 वर्षीय होनहार बालिका आर्या चौहान ने नोएडा टैलेंट हंट खेल प्रतियोगिता में असाधारण प्रदर्शन करते हुए तीन पदक अर्जित किए हैं। उनकी यह उपलब्धि बाल प्रतिभा, अनुशासन, अथक परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति का अनुपम उदाहरण है।

प्रोमिथियस स्कूल के चेयरमैन श्री मुकेश शर्मा जी द्वारा आयोजित इस खेल प्रतियोगिता में नोएडा के विभिन्न प्रतिष्ठित विद्यालयों के प्रतिभावान खिलाड़ियों ने सहभागिता की। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच आर्या ने जिमनास्टिक्स और तैराकी में अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली परिचय देते हुए दो कांस्य पदक तथा एक स्वर्ण पदक सहित कुल तीन पदक अपने नाम किए।

आर्या ने जिमनास्टिक्स की अंडर-12 श्रेणी में बैलेंसिंग बीम स्पर्धा में कांस्य पदक प्राप्त किया। वहीं तैराकी की 100 मीटर बैक स्ट्रोक अंडर-12 स्पर्धा में भी कांस्य पदक अर्जित कर अपनी बहुआयामी खेल प्रतिभा का परिचय दिया। इसके अतिरिक्त जिमनास्टिक्स की सामूहिक स्पर्धा में प्रोमिथियस स्कूल की टीम ने नोएडा के विभिन्न विद्यालयों के मध्य स्वर्ण पदक प्राप्त किया, जिसमें आर्या भी विजेता दल की महत्वपूर्ण सदस्य रहीं।

प्रोमिथियस स्कूल की कक्षा सातवीं की छात्रा आर्या विगत दो वर्षों से नियमित रूप से जिमनास्टिक्स और तैराकी का अभ्यास कर रही हैं। वह विजय श्री स्पोर्ट्स अकादमी में प्रशिक्षक इशु चौधरी जी के मार्गदर्शन में जिमनास्टिक्स तथा प्रोमिथियस स्कूल स्पोर्ट्स अकादमी में प्रशिक्षक करमवीर जी के निर्देशन में तैराकी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। अल्पायु में ही दोनों खेल विधाओं में उनकी निरंतर सक्रियता यह प्रमाणित करती है कि प्रतिभा को यदि उचित मार्गदर्शन, अनुशासन और अनुकूल परिवेश प्राप्त हो, तो सफलता की राह स्वयं प्रशस्त होने लगती है।

आर्या के पिता श्री अभिषेक चौहान तथा माता डॉ. खुशबू सिंह हैं, जो सशक्त महिला उद्यमी संगठन की अध्यक्ष हैं। आर्या की इस उपलब्धि के पीछे परिवार का स्नेह, प्रोत्साहन और सतत सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। विशेष रूप से उनके नाना जी प्रतिदिन उन्हें खेल अकादमी तक ले जाने का दायित्व निभाते हैं। उनका यह समर्पण पारिवारिक आत्मीयता और बाल प्रतिभा के प्रति उत्तरदायित्व का सुंदर उदाहरण है।

आर्या अपनी माँ डॉ. खुशबू सिंह को अपना आदर्श मानती हैं। डॉ. खुशबू सिंह स्वयं खेल एवं स्वास्थ्य-साधना के प्रति समर्पित हैं तथा हाइरॉक्स (Hyrox) प्रतियोगिता में पोडियम विजेता रह चुकी हैं। उनकी सक्रिय फिटनेस जीवनशैली और संघर्षशील व्यक्तित्व आर्या के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत हैं। माँ और बेटी का यह प्रेरक संबंध इस शाश्वत सत्य को रेखांकित करता है कि परिवार में स्थापित आदर्श ही आने वाली पीढ़ी के व्यक्तित्व और संकल्प का निर्माण करते हैं।

आर्या का कहना है, “मैं हमेशा अपनी मम्मी को अपना रोल मॉडल मानती हूँ। उन्होंने मुझे सिखाया है कि जीवन में किसी भी खेल अथवा लक्ष्य के लिए कभी हार नहीं माननी चाहिए। निरंतर प्रयास करना और प्रतियोगिता में सहभागिता निभाना सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है।”

आर्या का स्वप्न है कि खेल उनके जीवन का स्थायी अंग बना रहे। वह जिमनास्टिक्स, तैराकी सहित अपनी अन्य रुचियों में निरंतर अभ्यास करते हुए भविष्य में उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करना चाहती हैं।

आर्या की यह सफलता केवल तीन पदकों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन असंख्य बेटियों के लिए आशा और आत्मविश्वास का संदेश है, जिनके हृदय में बड़े स्वप्न पलते हैं। यह उपलब्धि समाज को भी स्मरण कराती है कि बेटियों को अवसर, प्रोत्साहन और समान मंच प्रदान किया जाए, तो वे अपनी प्रतिभा से सफलता के नए प्रतिमान स्थापित कर सकती हैं। बेटियाँ किसी परिवार का गौरव मात्र नहीं, अपितु राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। आर्या की पदक-विजय इसी अटूट विश्वास की सशक्त अभिव्यक्ति है।

रिपोर्टर भगवत प्रसाद शर्मा

 

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