शारदा यूनिवर्सिटी में ‘ट्रस्टवर्दी डिजिटल नेटवर्क्स’ (ICCTDN 2026) पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का सफल आरंभ

ग्रेटर नोएडा: शारदा यूनिवर्सिटी ने साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (SAU) और CTIF ग्लोबल कैप्सूल के साथ मिलकर ‘ट्रस्टवर्दी डिजिटल नेटवर्क्स’ (ICCTDN 2026) पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सफलतापूर्वक शुरुआत की। तीन दिन चलने वाला यह इवेंट 3 जुलाई 2026 को खत्म होगा। इस कॉन्फ्रेंस में भारत और विदेशों से जाने-माने शिक्षाविद, रिसर्चर, वैज्ञानिक, पॉलिसी बनाने वाले, इंडस्ट्री के प्रतिनिधि और छात्र शामिल हुए, ताकि सुरक्षित, इंटेलिजेंट और मज़बूत डिजिटल नेटवर्क के भविष्य पर चर्चा की जा सके।
कॉन्फ्रेंस में 15 से ज़्यादा जाने-माने वक्ता, 12 टेक्निकल सेशन और 3 मुख्य भाषण (कीनोट एड्रेस) शामिल थे। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 6G कम्युनिकेशन, साइबर सिक्योरिटी, क्रिप्टोग्राफी, डिजिटल प्राइवेसी, सुरक्षित IoT, साइबर-फिजिकल नेटवर्क और मज़बूत AI-आधारित नेटवर्क जैसे अहम विषयों पर बात की गई। चर्चाओं में पर्यावरण, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, कचरा प्रबंधन और टिकाऊ खेती जैसे क्षेत्रों में ग्लोबल चुनौतियों से निपटने में नई टेक्नोलॉजी की भूमिका पर भी ध्यान दिया गया। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) को हासिल करने में इनके योगदान पर खास ज़ोर दिया गया।
उद्घाटन सत्र में बोलते हुए शारदा यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर प्रो. वाई.के. गुप्ता ने कहा “आज डिजिटल टेक्नोलॉजी जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है; इसलिए, सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल सिस्टम विकसित करना समय की ज़रूरत है। इस कॉन्फ्रेंस ने शिक्षा जगत, इंडस्ट्री और नीति-निर्माताओं को सार्थक बातचीत करने के लिए एक मंच प्रदान किया। यहाँ पेश किए गए विचार और रिसर्च डिजिटल सुरक्षा को मज़बूत करने और नई टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।”
शारदा यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) सिबाराम खारा ने कहा “ICCTDN 2026 न केवल रिसर्च पेश करने का मंच था, बल्कि विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के लिए ज्ञान और अनुभव साझा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी था। चर्चाओं में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल नेटवर्क भविष्य की सबसे अहम ज़रूरत हैं। हमें विश्वास है कि यह कॉन्फ्रेंस नए सहयोग और तकनीकी इनोवेशन को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।” 
भारत सरकार के टेलीकम्युनिकेशन विभाग के डायरेक्टर जनरल (टेलीकॉम) श्री आनंद खरे ने कहा: “डिजिटल भरोसा और मज़बूती राष्ट्रीय प्राथमिकताएं हैं। ICCTDN 2026 जैसी कॉन्फ्रेंस सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं, जो भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करेंगी और टिकाऊ विकास में मदद करेंगी।”
डब्ल्यूपीएमसी एवं सीटीआईएफ ग्लोबल कैप्सूल, डेनमार्क के फाउंडिंग चेयरमैन प्रो. रामजी प्रसाद ने इस बात पर गौर करते हुए कहा “डिजिटल दुनिया का भविष्य केवल नई तकनीकों के विकास पर ही नहीं, बल्कि उन पर लोगों के भरोसे पर भी निर्भर करता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), 6जी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में वैश्विक सहयोग पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। इस कॉन्फ्रेंस ने दुनिया भर के विशेषज्ञों को अपने विचार, अनुभव और शोध साझा करने का एक प्रभावी मंच प्रदान किया। मुझे विश्वास है कि यहां हुए विचार-विमर्श सुरक्षित, भरोसेमंद और मानव-केंद्रित डिजिटल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।”
इस सत्र के दौरान आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परमंड, डीन एकेडमिक डॉ. आर. सी. सिंह, डॉ. पल्लवी गुप्ता, डीन रिसर्च डॉ. भुमनेश कुमार, रजिस्ट्रार डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. रुचि गर्ग, डॉ. उषा तिवारी, डॉ. प्रमोद कुमार, एन. बी. सिंह सहित सभी विभागों के डीन, फैकल्टी मेंबर्स, स्टाफ, स्टूडेंट्स आदि मौजूद रहे।






