हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर पत्रकार संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन में साहित्य और पत्रकारिता का अनूठा संगम
करते ही सुमिरन हिंदी का, मन छंद-छंद हो जाता है - पं. सुरेश नीरव

ग्रेटर नोएडा/गौतमबुद्धनगर: हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के तत्वावधान में पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट, ग्रेटर नोएडा में पत्रकार संगोष्ठी एवं भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। साहित्य, पत्रकारिता और सांस्कृतिक चेतना के इस गरिमामय संगम में देश-विदेश के अनेक साहित्यकारों, कवियों एवं पत्रकारों ने प्रत्यक्ष तथा ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ लोकप्रिय कवयित्री मधु मिश्रा की सरस्वती वंदना से हुआ। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रज्ञान आंदोलन के संपादक पंडित सुरेश नीरव ने की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पंडित सुरेश नीरव ने साहित्य और हिंदी पत्रकारिता के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि साहित्य और पत्रकारिता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। साहित्य समाज के शाश्वत सत्य, मानवीय संवेदनाओं और जीवन-मूल्यों को स्वर देता है, जबकि पत्रकारिता समकालीन यथार्थ, घटनाक्रम और जनसरोकारों का दस्तावेज प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि आज प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑनलाइन माध्यमों के विस्तार से पत्रकारिता का स्वरूप व्यापक हुआ है, किंतु इसके साथ विश्वसनीयता, निष्पक्षता, तथ्यपरकता और बाजारगत दबाव जैसी चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को साहस, सत्यनिष्ठा और सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ अपने मूल्यों की रक्षा करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। साहित्य पत्रकारिता के अंतर्मन को संवेदनशील बनाता है और पत्रकारिता साहित्य की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। दोनों का समन्वय सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करता है।

इस अवसर पर प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र हिंद आत्मा के संपादक एवं प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की कार्यकारिणी के सदस्य अशोक कौशिक ने वर्तमान हिंदी पत्रकारिता की चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज के समक्ष सत्य को प्रभावशाली एवं उत्तरदायित्वपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करना तथा समाचार माध्यम की विश्वसनीयता बनाए रखना है। बदलते मीडिया परिवेश में पत्रकारों को त्वरित समाचार के साथ तथ्य-सत्यापन, निष्पक्षता और जनविश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में भव्य कवि सम्मेलन हुआ। देश-विदेश से जुड़े कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी के प्रति श्रद्धा, प्रेम और सम्मान की भावधारा प्रवाहित की। कवयित्री रचना दीक्षित ने अपनी सरस एवं प्रभावशाली कविताओं से श्रोताओं को भावविभोर किया। कवि सम्मेलन में हिंदी की महिमा, भारतीय संस्कृति, मातृभाषा का गौरव, अध्यात्म, विज्ञान तथा सामाजिक सरोकारों से संबंधित रचनाएँ प्रस्तुत की गईं।
आयोजन में राजपाल यादव ‘राज’, उपमा गुप्ता, महेश अद्याना ‘मधुर’, प्रमिला भारद्वाज व्यास, प्रतीक्षा तिवारी, आर. एन. सिंह, के. पी. चौहान, भूदत्त शर्मा, अलका शर्मा, उमानाथ त्रिपाठी, गीता रस्तोगी, डॉ. प्रेमलता नीलम, डॉ. राधा बिष्ट, डॉ. भगवत प्रसाद शर्मा, डॉ. रवींद्र कीर्ति, डॉ. सुनीति रावत, डॉ. एन. झा, मृत्युंजय दीक्षित, रूपचंद्र झा ‘मयंक’, बोधिसत्व गौतम, दया सिन्हा, विमल बहुगुणा, यज्ञपाल सिंह ‘यश’, डॉ. श्रद्धानंद झा, नीलम पाठक, गिरिजा कुलश्रेष्ठ, ऋषि सिन्हा, अजय शर्मा, दीपशिखा रावल तथा डॉ. नरेंद्र प्रसाद ‘प्राची’ सहित अनेक साहित्यकारों एवं कवियों ने सहभागिता की।
अमेरिका, चीन, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, कुवैत और सऊदी अरब से जुड़े प्रवासी साहित्यकारों ने भी ऑनलाइन सहभागिता कर आयोजन की गरिमा बढ़ाई। अमेरिका से सुभाष चंद्र लखेड़ा एवं आनंद कुमार वर्मा, चीन से सुनीता चौहान एवं चिन्मय चतुर्वेदी, स्विट्जरलैंड से शाश्वती दीक्षित, जर्मनी से शरद गुप्ता एवं प्रकाश स्वरूप, कुवैत से संगीता चंद्र गुप्ता एवं उमेश चंद गैरोला तथा सऊदी अरब से डॉ. अजीत वर्मा, सुनीता माहेश्वरी, सुरेंद्र कुमार सैनी, अमीना खातून एवं अब्बास हैदर सहित अनेक रचनाकार जुड़े।
रिपोर्टर-भगवत प्रसाद शर्मा






