गाय के गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन ग्रामीणों में खुशी
जल्द गौमाता को किसान ग्रामीण पालनहार समझेंगे -डॉ शैलेश रौसा

बिलासपुर:हाईटेक गौतमबुद्धनगर जिले की सदर तहसील क्षेत्र का गांव सरकपुर स्थित डाक्टर शैलेश रौसा संस्थापक पंचगव्य इलैक्ट्रो प्राकृतिक आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से इलाज करने के साथ ही गौशाला संस्थापक भी हैं। गौशाला परिसर में गाय गोबर से लकड़ियां बनाए जाने की मशीन ग्रामीणों के लिए चर्चा के बीच खुशी का माहौल बना हुआ है। जहां गायों से ग्रामीणों व किसानों में अपनी फसलों को लेकर एक बड़ी समस्या बनी हुई है, अब गायों को लेकर एक नई उम्मीद नजर आ रही है। गौशाला डाक्टर शैलेश रौसा बताते हैं कि उनका मुख्य उद्देश्य आवारा गायों का महत्व व उद्देश्य के प्रति ग्रामीणों व किसानों को जागरूक करना है । यहां से शहर में पैकेट बंद गाय गोबर से बनी लकडिय़ां उपलब्ध कराई जाएगी। पेड़ों की कटाई न हो और हरियाली सुरक्षित रहे, इसके लिए यह पहल की गई है। इसके पीछे गौशाला का उद्देश्य यहीं है लकडिय़ों की कटाई रूके । गऊ माता को किसान ग्रामीण रोजगार देने पालन-पोषण वाली मां समझें जैसे पुर्व में समझा जाता था। इसके लिए हम हर विश्रामघाट में संपर्क कर गोबर की लकडिय़ों के लिए प्रेरित किया जाएगा।
गौवंश के सम्मान से ही सुरक्षित रहेगी धरती : डाक्टर शैलेश रौसा, गौशाला संस्थापक 
जब तक इस धरती पर गौवंश का सम्मान होगा, यह धरती मिट नहीं सकती। भारत की धरती अवतारों की धरती है और इस धरती पर महापुरूषों के अवतरण हुए है। हमारी सांस्कृतिक धरोहर और पहचान अहिंसा है। अन्य गौशालाओं को भी इससे जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। गोबर से बनी इन लकडिय़ों का पूजा आदि में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा क्योंकि इनका निर्माण गाय के गोबर से किया जा रहा है,

हवन-यज्ञ व अंत्येष्टि में उपयोग होगी गोबर से बनी लकड़ी : योगेश रौसा, गौशाला संचालक
खेतों से बेसहारा पशु हांके जा रहे थे। अब इन्हीं को दुलारा जाएगा। गांवों में गाय के गोबर का उपयोग उपले और खाद बनाने में किया जाता है लेकिन अब लकड़ी भी बना करेगी। गोशाला में एकत्रित होने वाले गोबर का इस्तेमाल लकड़ी बनाने में होगा। इसके लिए गोशाला में मशीन स्थापित की गई है । सरकपुर गांव स्थित गोशाला में प्रतिदिन क्विंटलों गोबर एकत्रित होता है, जिसका उपयोग अब लकड़ी बनाने के लिए किया जा रहा है। गोशाला में करीब 70 हजार रुपये की लागत से गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन स्थापित की गई है। वृहस्पतिवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य पूजन कर मशीन की शुरुआत की। गोशाला में तैयार होने वाली लकड़ी का उपयोग हवन-यज्ञ, पूजा तथा अंत्येष्टि आदि के लिए ही किया जाएगा।
रिपोर्ट घनश्याम पाल






