दक्षिण कोरिया के क्वांगवून विश्वविद्यालय के साथ गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक एमओयू, प्लाज्मा विज्ञान एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में वैश्विक शोध सहयोग को मिलेगी नई दिशा

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू), ग्रेटर नोएडा ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दक्षिण कोरिया के सियोल स्थित क्वांगवून विश्वविद्यालय के प्लाज्मा बायोसाइंस रिसर्च सेंटर (पीबीआरसी)एवं प्लासदे इनकॉर्पोएशन के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता प्लाज्मा विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार एवं तकनीकी विकास के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।
समझौते पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की ओर से कार्यवाहक कुलसचिव प्रो. राजीव वर्श्नेय तथा पीबीआरसी की ओर से प्रो. यून हा चोई ,मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्लासदे इनकॉर्पोएशन ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय की वैश्विक शैक्षणिक एवं शोध साझेदारियों को सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं वैज्ञानिकों को प्लाज्मा विज्ञान एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में उच्चस्तरीय अनुसंधान, नवाचार तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने के व्यापक अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी विश्वविद्यालय को वैश्विक शोध उत्कृष्टता की दिशा में नई पहचान दिलाएगी।
कार्यवाहक कुलसचिव एवम् डीन एकेडमिक्स प्रो. राजीव वर्श्नेय ने कहा कि यह सहयोग ज्ञान के आदान-प्रदान, अनुसंधान क्षमताओं के विस्तार तथा नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेष रूप से प्लाज्मा विज्ञान एवं उससे जुड़े बहुआयामी क्षेत्रों में संयुक्त शोध परियोजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक तकनीकों पर कार्य करने का अवसर मिलेगा।
प्रो. यून हा चोई, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्लासदे इनकॉर्पोएशन एवं अध्यक्ष, पीबीआरसी, क्वांगवून विश्वविद्यालय ने कहा कि यह साझेदारी समकालीन वैज्ञानिक एवं तकनीकी चुनौतियों का समाधान संयुक्त अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस समझौते से दोनों संस्थानों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान परियोजनाओं तथा वित्तीय सहायता प्राप्त करने के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।
समझौता हस्ताक्षर समारोह का आयोजन गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की डीन, प्लानिंग एंड रिसर्च प्रो. एस. धनलक्ष्मी द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. नागेन्द्र कुमार कौशिक, उपाध्यक्ष, पीबीआरसी , क्वांगवून विश्वविद्यालय एवं निदेशक मंडल के सदस्य, प्लासदे इनकॉर्पोएशन. सहित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के विभिन्न संकाय सदस्य एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पांच वर्षों के लिए किए गए इस समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थान वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग करेंगे। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में प्लाज्मा डिवाइसेज़ एवं डायग्नोस्टिक्स, मटेरियल साइंस, प्लाज्मा प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर एवं लाइफ साइंसेज़ में प्लाज्मा अनुप्रयोग, प्लाज्मा एग्रीकल्चर, लो-टेम्परेचर प्लाज्मा टेक्नोलॉजी, प्लाज्मा आधारित अपशिष्ट प्रबंधन, अंतरिक्ष एवं इलेक्ट्रिक थ्रस्टर तकनीक, कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग तथा अन्य परस्पर सहमत अनुसंधान क्षेत्र शामिल हैं।
समझौते के तहत दोनों संस्थान फैकल्टी सदस्यों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यशालाओं, सेमिनारों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा संयुक्त शोध प्रकाशनों को भी प्रोत्साहित करेंगे। इससे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को वैश्विक स्तर पर अनुसंधान एवं नवाचार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
इस एमओयू की एक विशेषता इसका व्यापक संस्थागत दायरा है। इसके अंतर्गत गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सभी स्कूल, विभाग एवं केंद्र इस सहयोग का लाभ उठा सकेंगे। वहीं, पीबीआरसी एवं प्लासदे इनकॉर्पोएशन. अपने सहयोगी विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के वैश्विक नेटवर्क के माध्यम से बहुविषयक अनुसंधान एवं शैक्षणिक सहयोग के लिए एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराएंगे।
यह समझौता भारत एवं दक्षिण कोरिया के बीच शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक संबंधों को और अधिक मजबूत करेगा तथा उन्नत अनुसंधान, क्षमता निर्माण, तकनीकी विकास एवं मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय लगातार विश्वस्तरीय संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित कर अपनी वैश्विक शैक्षणिक पहचान को सुदृढ़ कर रहा है। विश्वविद्यालय का यह प्रयास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्कृष्ट अनुसंधान, नवाचार एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत बनाता है।






