ग्रेटर नोएडा

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में “पदार्थ और ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए उपकरण” पर एक सप्ताह का राष्ट्रीय संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय , ग्रेटर नोएडा के अनुप्रयुक्त भौतिकी विभाग और राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान चंडीगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आज से “सामग्री और ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए उपकरण” विषय पर एक सप्ताह के राष्ट्रीय संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल गेस्ट हाउस ऑडिटोरियम में आयोजित इस पांच दिवसीय कार्यक्रम का औपचारिक प्रारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और राष्ट्र के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए राष्ट्रगीत “वंदे मातरम” के पावन गान से हुआ। इसके उपरांत, आयोजन समिति द्वारा कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक एवं माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह तथा संरक्षक व कुलसचिव प्रो. चंदर कुमार सिंह का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत और अभिनंदन किया गया। उद्घाटन सत्र में अनुप्रयुक्त भौतिकी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मौसमी पोहित ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

इसके बाद पर्यावरण भू-रसायन, भूजल संदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में वर्षों का शोध अनुभव रखने वाले कुलसचिव एवं डीन प्रो. चंदर कुमार सिंह ने पर्यावरण संरक्षण और नेट ज़ीरो एमिशन (शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हाइड्रोजन ईंधन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। कैंसर जीवविज्ञान, ट्यूमर एंजियोजेनेसिस और सिस्टम्स मेडिसिन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान, माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने अपने प्रेरक उद्घाटन भाषण में सेल्फ-हीलिंग मटेरियल्स के महत्व और एरोजेल के विभिन्न अनुप्रयोगों की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने मनुष्य के सोचने की प्रक्रिया में आवश्यक ऊर्जा के मात्रात्मक माप का एक दिलचस्प वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा किया, साथ ही शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय ख्याति के अग्रणी संस्थानों के साथ मिलकर सकारात्मक सहयोगात्मक अनुसंधान करने के लिए पुरजोर प्रेरित किया।

उद्घाटन समारोह के समापन पर कार्यक्रम के संयोजक डॉ. विवेक कुमार शुक्ला द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसके तुरंत बाद सभी उपस्थित जनों ने सम्मानपूर्वक राष्ट्रगान “जन गण मन” का गायन किया।

तकनीकी सत्रों की शुरुआत करते हुए प्रथम सत्र में ऊर्जा रूपांतरण और भंडारण उपकरणों के विशेषज्ञ डॉ. विवेक कुमार शुक्ला ने ‘ऊर्जा स्रोतों और प्रणालियों’ पर एक विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया। दोपहर के सत्र में ऊर्जा अर्थशास्त्र, संधारणीय विकास और नीतिगत मुद्दों के विशेषज्ञ टेरी (TERI), दिल्ली के प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं सह-आचार्य डॉ. गोपाल के. सारंगी ने “भारत में ऊर्जा संक्रमण की जटिलताओं को समझना” विषय पर अपना मुख्य व्याख्यान दिया। प्रथम दिन की सभी शैक्षणिक गतिविधियों का समापन डॉ. विवेक कुमार शुक्ला और डॉ. आशीष कुमार केशारी के मार्गदर्शन में आयोजित एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तरी और चर्चा सत्र के साथ हुआ। इस पूरे कार्यक्रम के सफल संचालन में आयोजन समिति के सम्मानित सदस्यों डॉ. मनमोहन सिंह, डॉ. भावना जोशी, डॉ. वीनस डिल्लू, डॉ. ज्योति, डॉ. कोमल, डॉ. कल्लोल, डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. जया मैत्रा, डॉ. आशा पांडे, डॉ. भास्वती, डॉ. अनुराग बघेल, डॉ. एच. सी. ठाकुर, डॉ. धर्मवीर मंगल, डॉ. संजीव, डॉ. रितु , छात्र स्वयंसेवकों रेखा, मानव, ज्योति मंडल, कनिका, और दीक्षा आदि एवं विभाग के कर्मचारियों ने अपनी सक्रिय व सराहनीय उपस्थिति दर्ज कराते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह राष्ट्रीय संकाय विकास कार्यक्रम 11 सितंबर, 2026 तक ऊर्जा उत्पादन और भंडारण के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम वैश्विक बदलावों पर केंद्रित रहेगा, जिसमें देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। आने वाले दिनों में डॉ. समरेंद्र प्रताप सिंह (शिव नादर इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस) अगली पीढ़ी के ऊर्जा उपकरणों की रूपरेखा पर, इंजीनियर विवेक शुक्ला (डीजीएम, इंडियन ऑयल) हाइड्रोजन भंडारण और परिवहन पर, डॉ. भानु प्रताप सिंह (वैज्ञानिक जी , एनपीएल नई दिल्ली) कार्बन नैनो ट्यूब पर, और प्रो. मोनिका तोमर (दिल्ली विश्वविद्यालय) ऊर्जा संचयन पर अपने विचार साझा करेंगे। इनके साथ ही डॉ. सतीश कुमार वर्मा (शारदा विश्वविद्यालय), डॉ. बिनसन बाबू (शिव नादर विश्वविद्यालय), प्रो. पंकज शर्मा (NITTTR चंडीगढ़) उन्नत हरित ऊर्जा सामग्रियों पर, और डॉ. पराग शर्मा (वैज्ञानिक एफ , एनपीएल ) ऑप्टिकल ऊर्जा मापन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करेंगे।

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