
औरंगाबाद (बुलंदशहर )अमर सिंह महाविद्यालय लखावटी में शनिवार को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486 वीं जयंती पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के जीवन वृत्त और देश समाज हित में किए गए कार्यों व उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ अवधेश प्रताप सिंह ने किया। उन्होने महाराणा प्रताप को शौर्य, वीरता और पराक्रम की प्रतिमूर्ति बताया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ मनीष मिश्रा ने महाराणा प्रताप और समाज पर पड़ने वाले उनके व्यक्तित्व के प्रभाव को बताया। कार्यक्रम संयोजक डॉ रामजी द्विवेदी ने महाराणा प्रताप को भारतीय इतिहास का महान योद्धा और वीर शासक बताया तथा कहा कि वे अपनी बहादुरी स्वाभिमान और मुग़ल साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होने 18 जून 1576 ई0 में हुए हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप और उनके घोड़े चेतक की वीरता पर विस्तार से जानकारी दी और कहा कि इस युद्ध में कोई निर्णायक जीत नहीं हुई लेकिन महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी और संघर्ष जारी रखा।
उन्होने महाराणा प्रताप के संघर्षों की गाथा सुनाते हुए युद्ध क्षेत्र में उनके कठिन संघर्षों विषमताओं और घास की रोटी खाने का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होने मेवाड के अधिकांश हिस्सों को वापस जीत लिया था। उनकी मृत्यु 19जनवरी 1597में हो जाने के बावजूद अपनी वीरता अदम्य साहस और बलिदान के चलते वे इतिहास के पन्नों में सदा सदा के लिए अमर हो गए।
इसी अवसर पर 10मई 1857को मेरठ में हुए क्रांति का सूत्रपात के उपलक्ष में क्रांति पर्व भी मनाया गया। जिसमें 1857की क्रांति विषयक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें महा विद्यालय की छात्रा वंशिका शर्मा अव्वल रहीं।
विजयी छात्रा को प्रशस्ति पत्र एवं मैडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। डॉ दिव्या बाला पाठक ने धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम का समापन किया।
डॉ दुष्यंत कुमार शर्मा,ध्रुव कुमार,अभय कुमार श्रीवास्तव, पुष्पेन्द्र मलिक रोहतास आदि दर्जनों लोग मौजूद रहे।
रिपोर्टर राजेंद्र अग्रवाल






