वाल्मीकि श्मशान घाट पर पहुंचने का रास्ता ही नहीं खेतों की मैड़ से लेकर जाने को विवश अर्थियां
विकास के दावे किए जा रहे हैं फर्जी

औरंगाबाद (बुलंदशहर)नगर पंचायत औरंगाबाद में वाल्मीकि समाज के लोगों को अपने मृत परिजनों की अर्थी खेतों की मेड़ और बरहा में होकर श्मशान घाट पर ले जाने के लिए बाध्य होना पड़ता है। ऐसा इसलिए करना पड़ता है क्योंकि श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता ही नहीं बनाया गया है। वाल्मीकि समाज के लोगों में काफी रोष व्याप्त है लेकिन उनकी व्यथा कोई सुनने वाला नहीं।ना कोई विधायक ना कोई सांसद। और नगर पंचायत के सर्वेसर्वाओं की तो बात ही छोड़ दीजिए उन्हें जनता की कोई परवाह ही नहीं है। 
भाजपा सरकार में शासन प्रशासन जन सुविधाओं को बेहतर ढंग से मुहैया कराने के तमाम दावे करता नजर आ रहा है। क्षेत्रीय विधायक, और सांसद द्वारा भी तमाम क्षेत्र का चहुंमुखी विकास कराने के ढोल पूरी शिद्दत से पीटे जा रहे हैं लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। कस्बा औरंगाबाद में वाल्मीकि समाज के श्मशान घाट का रास्ता इसका जीता जागता नमूना है। वाल्मीकि समाज का श्मशान घाट उबड़-खाबड़ है। साफ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। ना ही कोई चारदीवारी ना किसी के बैठने की कोई व्यवस्था। और तो और श्मशान घाट पहुंचने के लिए कोई रास्ता ही नहीं बनाया गया है। रास्ते के अभाव में वाल्मीकि समाज के लोग मृत परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां सिरों पर ढोकर ले जाते हैं। मृतक की अर्थी को खेतों की मेड़,बरहा, उबड खाबड़ राह से होकर गुजरना पड़ता है। मृतक के परिजनों को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता है यह कोई भुक्तभोगी ही भली प्रकार समझ सकता है।
ऐसा नहीं है कि वाल्मीकि समाज के लोगों ने श्मशान घाट पर पर पहुंचने के लिए रास्ता बनवाने की मांग ना की हो। हर चुनाव से पूर्व रास्ता बनवाने का आश्वासन दिया जाता है लेकिन चुनाव जीतने वाले , वाल्मीकि समाज से किये अपने वायदे को पूरा करने में असमर्थ ही रहे। वाल्मीकि समाज की आवाज सुनने वाला है कोई?
रिपोर्टर राजेंद्र अग्रवाल






