ग्रेटर नोएडा

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में पांचवीं पी.एन. माथुर मेमोरियल नेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता का समापन, पंजाब विश्वविद्यालय की टीम बनी विजेता

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू), ग्रेटर नोएडा के स्कूल ऑफ लॉ, जस्टिस एंड गवर्नेंस द्वारा आयोजित पांचवीं पी.एन. माथुर मेमोरियल नेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026 का रविवार को समापन हुआ। 31 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं विधि संस्थानों की कुल 53 टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने अपनी कानूनी समझ, शोध क्षमता, तार्किक विश्लेषण, विधिक प्रारूपण और वाद-विवाद कौशल का प्रदर्शन किया।

समापन समारोह का शुभारंभ स्कूल ऑफ लॉ, जस्टिस एंड गवर्नेंस के डीन डॉ. के.के. द्विवेदी के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने आमंत्रित अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों, संकाय सदस्यों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रतियोगिता के आयोजन के उद्देश्यों और इसकी शैक्षणिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट प्रतियोगिताएं विधि विद्यार्थियों को न्यायिक प्रक्रिया की व्यावहारिक समझ विकसित करने तथा भविष्य के कानूनी पेशेवरों के रूप में स्वयं को तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं।

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. प्रदीप राय उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने भावी कानूनी पेशेवरों के व्यक्तित्व और व्यावसायिक कौशल के विकास में मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच विद्यार्थियों में वकालत के आवश्यक गुणों को विकसित करने के साथ-साथ उनकी तार्किक क्षमता और अभिव्यक्ति कौशल को भी निखारते हैं। उन्होंने युवा विधि विद्यार्थियों को इस प्रकार के अवसर प्राप्त होने पर बधाई देते हुए सलाह दी कि वे अपने ज्ञान को शालीनता, विनम्रता और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाएं तथा एक विद्वान एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का प्रयास करें।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने अपने समापन संबोधन में प्रतियोगिता में महिला प्रतिभागियों की बढ़ती भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह बदलाव स्वर्गीय श्री पी.एन. माथुर के उस सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, जिसमें महिलाओं की शिक्षा एवं उनकी सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने की भावना निहित थी।

न्यायमूर्ति मसीह ने युवा विधि विद्यार्थियों और भावी अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वकालत के पेशे में सफलता के लिए पूरी लगन, मेहनत और समर्पण के साथ कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि अधिवक्ताओं को मुवक्किल के उनके पास आने से पहले ही अपने ज्ञान, शोध और तैयारी पर निरंतर काम करते रहना चाहिए। उन्होंने विधिक शोध और ड्राफ्टिंग के कौशल को विकसित करने में मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लिखित दलीलें मौखिक बहस जितनी ही महत्वपूर्ण होती हैं और मूट कोर्ट विद्यार्थियों को वकालत के पेशे में प्रवेश करने से पहले व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का उत्कृष्ट मंच प्रदान करता है।

उन्होंने आगे कहा कि कानून का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है और इसमें युवाओं के लिए असीम संभावनाएं मौजूद हैं। विद्यार्थियों को विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए तथा कानून के उभरते हुए नए क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को पहचानकर अपनी प्रतिभा एवं उद्यमशीलता का उपयोग करना चाहिए।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने विशेष रूप से सीनियर एडवोकेट श्रीमती सोनिया माथुर के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस प्रतियोगिता के आयोजन को समर्थन देने के लिए सराहनीय पहल की। उन्होंने प्रतिभागी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इस दो दिवसीय आयोजन ने उन्हें अपने ज्ञान, प्रतिभा और विधिक कौशल को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। मुख्य अतिथि के प्रेरणादायक संबोधन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और न्यायपालिका के प्रति विश्वास को बनाए रखना एवं मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ये दोनों एक न्यायपूर्ण और सशक्त समाज के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

इसके पश्चात प्रतियोगिता की संयोजक डॉ. रमा शर्मा ने दो दिवसीय आयोजन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों एवं प्रतिभागियों के प्रदर्शन की जानकारी साझा करते हुए परिणामों की घोषणा की।

प्रतियोगिता के प्रमुख परिणाम इस प्रकार रहे:

विजेता: पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज की टीम, जिसमें अंशुल भारद्वाज, गुररोबिनप्रीत सिंह और गुरलीन कौर शामिल रहे।

उपविजेता: आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी, देहरादून की टीम, जिसमें तनीषा अग्रवाल, कशिश मिश्रा और अथर्व अग्रवाल शामिल रहे।

बेस्ट मेमोरियल पुरस्कार: दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ लॉ (इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स) के दुष्यंत बेनीवाल, तान्या टोंक और पार्थ त्यागी को प्रदान किया गया।

बेस्ट स्पीकर पुरस्कार: इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज की जिया शुक्ला को प्रदान किया गया।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं एवं प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। डॉ. रमा शर्मा ने सभी प्रतिभागियों को उनके प्रदर्शन के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

समारोह का समापन विधि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश चंद्रा द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, विश्वविद्यालय के कुलपति, डीन, संकाय सदस्यों, प्रतिभागियों, आयोजन समिति तथा विद्यार्थियों का प्रतियोगिता को सफल बनाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम का संचालन संयोजक के रूप में डॉ. ममता शर्मा और डॉ. रमा शर्मा तथा सह संयोजक डॉ. सागर और सुश्री सौम्या बरनवाल ने सफलतापूर्वक किया।

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