संघ एवं सनातनी परिवारों का संघर्ष बना आशा का प्रकाश – दिव्य अग्रवाल (सनातनी विचारक एवं लेखक )

विचार:पश्चिम बंगाल की विजय मात्र एक राजनीतिक विजय नहीं बल्कि वो उम्मीद की किरण जो भाजपा के विजय के रूप में प्रकाशमान हुई है । यह प्रतीक्षा पिछले 74 वर्षो से प्रत्येक स्वयंसेवक और सनातनी का परिवार कर रहा था बंगाल के हिन्दुओ ने अपना नरसंहार देखा, अपने परिवारों की महिलाओं की लूटती अस्मिता देखी, हिन्दुओं के अपहरण देखे , सनातनी पूजा पद्धति पर आघात देखे, अपना पलायन देखा जिसके देखते देखते पश्चिम बंगाल के लोगो के आँखों के अश्रु भी बहने बंद हो गए थे। कहते हैं जब संघर्ष निरंतर किया जाए तो एक न एक दिन सुखद परिणाम मिलता ही है बंगाल में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व के साथ साथ जो राष्ट्रीय स्वयं सेवकों की दशकों की सेवा है आदरणीय नाथ पूजनीय योगी जी महाराज की लोकप्रियता है इन तीनो के समावेश से सनातनियों ने पश्चिम बंगाल से मजहबी कट्टर वादिता के शासन को समाप्त कर दिया है । आशा है पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश की तरह भय मुक्त होगा और सनातनियों को सुरक्षित जीवन का अनुभव होगा ।
यह सत्य है की संघ के सेवक जब उत्कृष्ट नेतृत्व के साथ काम करते हैं तो पूरा विश्व उसकी सफलता के प्रमाण देखता है बंगाल की विजय ने उत्तर प्रदेश की विजय भी सुनिश्चित कर दी है हमने देखा है की मोदी जी झालमुरी और योगी बाबा के बुलडोजर की लोकप्रियता बंगाल के घर घर में पहुँच चुकी थी ।




