दिल्ली एनसीआर

दूसरा दिन:मजबूत सोर्सिंग गतिविधि और आगंतुकों की लगातार बढ़ती संख्या ने आईएचजीफए दिल्ली मेले की वैश्विक अपील का दिया प्रमाण 

‘ग्लोबल बायर ट्रेंड्स 2027’ और ‘हाउ एक्सपोर्ट्स कैन नैविगेट प्रोडक्शन एंड सोर्सिंग इन द वर्ल्ड ऑफ एआई’ आदि विषयों पर आयोजित सेमिनार्स में उदयोग जगत की मजूबत भागीदारी देखने को मिली

दिल्ली- एनसीआर: हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) द्वारा 62वाँ आईएचजीएफ दिल्ली फेयर-ऑटम 2026 आयोजित किया जा रहा है। इस मेला का आयोजन 13 से 17 अक्टूबर 2026 तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में किया जा रहा है। मेला अपने दूसरे दिन में प्रवेश कर चुका है । आयोजन ने एक बार फिर अपने परंपरागत संरक्षकों और पहली बार आए ट्रेड विज़िटर्स—दोनों को बड़ी संख्या में आकर्षित किया है।

आगंतुकों, प्रतिभागियों और खरीदारों की उपस्थिति से प्रसन्न इपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने बताया, “आईएचजीएफ दिल्ली मेला – ऑटम 2026 के दूसरे दिन विश्वभर के खरीदारों की भारी संख्या देखी गई, जिसमें विशेष रूप से यूरोप से उत्साहजनक सहभागिता रही। प्रदर्शकों के स्टॉल पूरे दिन व्यस्त रहे, क्योंकि आगंतुकों ने नए संग्रहों को देखा, इनोवेटिव उत्पाद श्रेणियों की सराहना की और कई ऑर्डर भी फाइनल भी किए। इस संस्करण में हैंडलूम, हस्तशिल्प तथा होम लाइफस्टाइल उत्पादों की थीम-आधारित प्रस्तुतियाँ अपना विशेष ध्यान खींच रही हैं, जबकि मेले और आगंतुकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की व्यापक सराहना हुई। पहली बार आने वाले कई आगंतुकों ने कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली मेले को व्यक्तिगत रूप से देखना भारत के हस्तशिल्प उद्योग के आकार, विविधता और जीवंतता को समझने के लिए अनिवार्य है।”

इस भावना को विस्तार देते हुए ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने मेले में उनसे मिलने आए कुछ नियमित खरीदारों का उल्लेख किया और कहा कि, ये खरीदार न केवल भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता की सराहना करते हैं, बल्कि भारतीय उद्यमियों, उद्यम की व्यावसायिकता (प्रोफेशनलिज्म) की भी सराहना करते हैं। उन्होंने कहा, “वर्षों से हस्तशिल्प क्षेत्र विशेषकर होम एंड लाइफस्टाइल उत्पाद क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसमें समावेश तथा डिज़ाइन, उत्पादन, विपणन और प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति को अपनाया गया है। आईएचजीएफ के माध्यम से हम अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के सर्वश्रेष्ठ की मांग पूरी कर रहे हैं। हमारे कई दीर्घकालिक खरीदार, जो वर्षों से भारत से सोर्सिंग कर रहे हैं, इस परिवर्तन को स्वयं देख चुके हैं। वे भारतीय विक्रेताओं की बढ़ती उत्कृष्टता और निर्माण से लेकर निर्यात तक हर चरण में बरती जाने वाली सावधानी से परिचित हैं। इन सारे कारकों ने ने भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता, विविधता और समग्र आकर्षण को बढ़ाया है।”

आज मेले का दौरा श्री सैयद ज़फर इस्लाम, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व सांसद (राज्यसभा) ने भी किया। उन्होंने विभिन्न प्रदर्शनी हॉल का भ्रमण किया और भाग ले रहे निर्यातकों से बातचीत की। इस दौरान उन्हें 62वें आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 में प्रदर्शित हस्तशिल्प, होम, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्निशिंग और फर्नीचर उत्पादों की विविध श्रृंखला के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही, उन्हें यह भी बताया गया कि यह मेला भारतीय निर्माताओं, निर्यातकों और कारीगरों को दुनिया भर के खरीदारों और सोर्सिंग प्रोफेशनल्स से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मेले के दौरान एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स और सोर्सिंग प्रोफेशनल्स एलायंस ने रणनीतिक सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य निर्यातकों और सोर्सिंग प्रोफेशनल्स के बीच संपर्क को मजबूत करना, बायर–सेलर मीट और बिजनेस नेटवर्किंग को बढ़ावा देना, व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा नॉलेज शेयरिंग, क्षमता निर्माण, जिम्मेदार सोर्सिंग और मार्केट इंटेलिजेंस से जुड़ी संयुक्त गतिविधियां करना है। इस साझेदारी से भारतीय हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई व्यावसायिक संभावनाएं और बेहतर बाजार पहुंच विकसित करने में मदद मिलेगी।

इस आयोजन में शिकरत कर रहे जर्मनी के खरीदार जैन फिलिप, जो पहली बार आईएचजीएफ दिल्ली मेले में होम डेकोर उत्पाद—विशेष रूप से कैंडल होल्डर—देखने आए हैं, ने कहा कि वे मेले में उत्पादों की और ज्यादा और विविध श्रेणियाँ देखना चाहते हैं और भविष्य में होने वाले मेले के संस्करणों में फिर आने की उम्मीद रखते हैं। अमेरिका से आईं रिटेल खरीदार स्टेवी बोस्कोविच दूसरी बार आईएचजीएफ दिल्ली मेले में आईं हैं। उन्होंने विभिन्न प्रकार के उत्पाद देखे, खास तौर पर होमवेयर और बैग। उन्हें कीमतें भी सही और प्रतिस्पर्धी लगीं। उनके मुताबिक कीमतें उत्पादों के अनुसार सही बैठती हैं। मिलनसार और स्वागतभरे प्रदर्शकों तथा मेले की अच्छी सुविधाओं की सराहना करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को शानदार, सकारात्मक और सुखद बताया।

ऑस्ट्रेलिया से आईं जूडिथ मेज़ोन और केट मालवेनन 2024 में आने के बाद फिर से आईएचजीएफ दिल्ली मेले में आईं हैं। होम डेकोर और फर्नीचर में रुचि रखने वाली इन खरीदारों को अपने व्यवसाय की जरूरतों के अनुसार विशेष डिज़ाइन और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद देखने हैं। वे भारतीय उत्पादों की कारीगरी, बारीकी और कुशल कारीगरों के कौशल की सराहना करती हैं। इस बार के अपने सकारात्मक अनुभव से उनकी नए संग्रह देखने, प्रदर्शकों से बातचीत करने और भारत में संभावित सोर्सिंग साझेदारी तलाशने में रुचि बनी हुई है। न्यूज़ीलैंड स्थित लाइफस्टाइल ब्रांड की वनेसा ब्रैमली लगभग 30 वर्षों से आईएचजीएफ दिल्ली मेले में आ रहे हैं और उन्होंने इसे नई दिल्ली में शुरुआती संस्करणों से अब तक विकसित होते देखा है। वे रिटेल और व्यावसायिक ग्राहकों के लिए लाइटिंग, गिफ्टवेयर, क्रिसमस सजावट तथा अन्य उत्पादों की सोर्सिंग करती हैं। उनकी कंपनी के निर्यात में भारत का हिस्सा लगभग 50 प्रतिशत है। वे सभी श्रेणियों में उत्पाद की गुणवत्ता में हुए महत्वपूर्ण सुधार की सराहना करती हैं और इस मेले को सोर्सिंग के लिए एक महत्वपूर्ण और मूल्यवान स्थान मानती हैं।

ईपीसीएच के उपाध्यक्ष श्री सागर मेहता ने मेले की बदलती आकार और नए प्रदर्शकों के जुड़ने के बारे में बताया कि इससे होम, हॉस्पिटैलिटी और व्यावसायिक क्षेत्रों से जुड़े आयातकों, रिटेलरों तथा विदेशी आगंतुकों को नई प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा, “भारत की विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हुए, आईएचजीएफ दिल्ली मेले में ऐसे उत्पाद प्रस्तुत किए जाते हैं जो समृद्ध कारीगरी की परंपराओं और प्रचुर कच्चे माल पर आधारित हैं। यह मेला खरीदारों को निर्माताओं से जुड़ने, नए विचार तलाशने और पूरे भारत के निर्माताओं से उत्पादों की सोर्सिंग तथा अपनी आवश्यकता के अनुसार कस्टमाइज़ेशन करने का अवसर देता है। आधुनिक सौंदर्यबोध के महत्वपूर्ण पहलू के साथ ही भारत की असाधारण और बारीक कारीगरी आज भी दुनिया भर के जानकार खरीदारों को आकर्षित करती है।”

आईएचजीएफ दिल्ली मेले–ऑटम 2026 की स्वागत समिति के अध्यक्ष श्री अवधेश अग्रवाल ने कहा, “मेला अपने सहायक कार्यक्रमों के साथ अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है।” अपनी बात को विस्तार देते हुए उन्होंने यही भी बताया कि आज आयोजित सेमिनारों से प्रदर्शकों और प्रतिभागियों को उपयोगी जानकारी मिली। ‘ग्लोबल बायर ट्रेंड्स 2027 – व्हाट विल सेल इन होम, लाइफस्टाइल, फैशन और इंटीरियर्स?’ विषयक सेमिनार ने निर्यातकों को बदलती खरीदार और उपभोक्ता प्राथमिकताओं, उभरते बाजार अवसरों, उत्पाद-बाजार अनुकूलता, सामग्री और डिज़ाइन की दिशा, सस्टेनेबिलिटी तथा ऐसी रणनीतियों से अवगत कराया जिन्हें अपनाकर वे वैश्विक जरुरतों को व्यावसायिक रूप से व्यवहारिक संग्रहों और निर्यात ऑर्डर में बदल सकते हैं। दूसरे सेमिनार में एक उद्योग विशेषज्ञ और रणनीतिकार ने प्रतिभागियों को बताया कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस यानी एआई किस तरह से उत्पादन प्लानिंग, उत्पाद विकास, सोर्सिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और सप्लाई-चेन प्रबंधन को बदल रही है। साथ ही, ये भी बताया कि निर्यातकों कैसे एआई को जिम्मेदारी से अपनाकर दक्षता और प्रतिस्पर्धा में फायदा उठाने में मदद ले सकते हैं।

आयोजन के आने वाले व्यावसायिक दिनों तथा प्रदर्शकों और आगंतुकों को जोड़ने के लिए ईपीसीएच द्वारा आयोजित योजनाबद्ध सहायक कार्यक्रमों पर बात करते हुए ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत ने कहा, “ईपीसीएच के आयोजनों पर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का निरंतर विश्वास इसी बात से स्पष्ट है कि वे तीन दशकों से अधिक समय से आईएचजीएफ दिल्ली मेले में नियमित रूप से भाग ले रहे हैं। इस संस्करण की शुरुआत भी जोशपूर्ण रही है—सक्रिय खरीदार पंजीकरण और पूरे स्थल पर जीवंत और शानदार माहौल देखा जा रहा है। यहां व्यस्त हॉल और अर्थपूर्ण व्यावसायिक बातचीत का वातावरण भी लगातार बना हुआ है। आगामी दिनों और ईपीसीएच द्वारा प्लान की गयी गतिविधियों से खरीदारों और प्रदर्शकों के बीच संपर्क तथा व्यापारिक अवसरों को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।”

ईपीसीएच देश से विश्व के विभिन्न गंतव्यों तक हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा देने और विदेश में भारत की छवि को उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में प्रस्तुत करने के लिए एक नोडल संस्थान है। इस अवसर पर ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये (3,754 मिलियन डॉलर) रहा।

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