राम वन गमन की मार्मिक लीला देख दर्शकों की आंखें हुईं नम

औरंगाबाद (बुलंदशहर)रामलीला पंडाल में बैठे सैकड़ों दर्शकों की आंखें नम हो गई जब राजा दशरथ के पुत्र राम को उनकी सौतेली मां केकई ने वनवास दिला दिया। गेरुआ वस्त्रों में राम-जानकी और लक्ष्मण को देख अनेक महिलाएं फूट फूटकर रोती दिखाई दीं,

प्राचीन नागेश्वर मंदिर के रामलीला मैदान में चल रही रामलीला में श्री राम लीला अभिनय मंडल के तत्वावधान में लोकप्रिय स्थानीय शौकिया कलाकारों ने राम बनवास की लीला का सजीव मंचन किया। लीला का शुभारंभ ऋषि कुमार गर्ग उर्फ रेशु और उनके अनुज राजेश गर्ग ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की आरती उतार कर किया। आयोजकों ने रामनामी पटका पहनाकर अतिथियों का स्वागत सत्कार किया और श्री राम का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
केकई दशरथ संवाद,केकई दशरथ राम संवाद, केकई द्वारा राम को राजा दशरथ के दो वचनों के बदले भरत को अयोध्या की राजगद्दी और राम को चौदह वर्ष के वनवास दिये जाने की जानकारी देते हुए वन प्रस्थान का आदेश दिया जाना, राम का माता कौशल्या से वन जाने की आज्ञा मांगने की लीला देख दर्शक भाव विह्वल हो उठे। वन जाने की तैयारी में लगे राम के साथ चलने का सीता द्वारा हट और लक्ष्मण द्वारा भाई संग वन जाने की आज्ञा मांगने, माता सुमित्रा द्वारा लक्ष्मण को सहर्ष भाई के साथ वन जाने और उनकी सेवा की सीख देते देख दर्शक गर्वित हो उठे। राम-जानकी लक्षमण के वन गमन करते देख दर्शकों की आंखें भर आईं। इसी के साथ लीला को विश्राम दिया गया।
सीता के रूप में चेतन कंसल और राम के रूप में अनुज सिंघल ने प्रभावित कर दिखाया। मंच संचालन मनोज कुमार गुप्ता ने किया। अध्यक्ष योगेश कुमार अग्रवाल, डायरेक्टर पुनीत कुमार सिंघल ध्रुव सिंघल राजीव कौशल मोहित कुमार मिक्की दीपक अग्रवाल दीनू नितिन सिंघल टीटू सर्राफ नवीन गोयल आदि ने व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया। पुलिस व्यवस्था चाक-चौबंद रही।
रिपोर्टर राजेंद्र अग्रवाल






