स्वामी दीक्षानन्द के साहित्य और व्याख्यानों की माला से मिलती है प्रेरणा-वीरेन्द्र विक्रम
स्वामी दीक्षानंद जी का 108 वां जन्मोत्सव सम्पन्न

गाज़ियाबाद :विद्यमार्तण्ड स्वामी दीक्षानन्द सरस्वती का 108 वाँ जन्मोत्सव हर्षौल्लास से आर्य समाज समर्पण शोध संस्थान,4/42, राजेंद्र नगर साहिबाबाद में हर्षोल्लास से मनाया गया।आचार्य वीरेन्द्र विक्रम ने यज्ञ कराया।मुख्य यज्ञमान नवाब सिंह आर्य व गीता आर्या, अविरल आर्य व सुकृति माथुर,मोहित भटनागर व अकंशा भटनागर यज्ञमान रहे।श्रद्धानंद ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
यज्ञ के ब्रह्मा वीरेंद्र विक्रम ने कहा कि स्वामी दीक्षानंद जी को जब देखेते थे तो वह राज ऋषि की तरह लगते थे उनकी वाणी तेज औज से पूर्ण होती थी स्वामी जी के साहित्य और व्याख्यानों की माला लोगों को जीवन में प्रेरणा देती रहेगी स्वामी जी ने ऋषि दयानंद को समर्पित होकर समस्त कार्य किया, प्राणपन से अपने जीवन को समर्पित किया। गुरुकुल प्रभात आश्रम मेरठ के आचार्य रहकर उसकी कीर्ति को बढ़ाया।
सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक अविरल माथुर,सुकृति आर्या एवं प्रवीण आर्य द्वारा स्वामी दीक्षानन्द गुणगान एवं ईश्वर भक्ति के गीतों को सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए।
डा वाचस्पति मिश्र ने कहा मनुष्य को मनुष्य बनाना संस्कारों का ही कमाल है।आचार्य पंडित विद्या प्रसाद मिश्र ने कहा कि श्रद्धा,समय,अनुशासन और सिद्धांतों का पालन करना चाहिए स्वामी जी के दिल की धड़कन यज्ञ था वह पूर्ण वैदिक रीति से यज्ञ कराया करते थे।
वैदिक प्रवक्ता राकेश भटनागर ने स्वामी दीक्षान्द के जीवन पर विस्तृत चर्चा करते हुए उनके कई प्रेरणादाई संस्मरण सुनाए जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए।वैदिक विद्वान रवीश वैदिक ने कहा कि स्वामी जी अपने विचारों से लोगों को लाभान्वित तो करते ही थे लेखन का कार्य भी करते थे जिससे वर्तमान व उनके बाद भी उनके लेखों से जनमानस का कल्याण हो सके।
इस अवसर पर मुख्य रूप से सर्वश्री सत्यवीर चौधरी,नरेन्द्र पांचाल,वीरेश रहेजा,गणेश प्रसाद,रमेश गाडी,शशि कांत, आदित्य आहूजा,जितेंद्र आर्य,प्रमोद चौधरी,के के यादव, देवेन्द्र आर्य, वेद प्रकाश शास्त्री,कविता राठी,सुभाष शर्मा, डा प्रमोद सक्सेना,ओमपाल शास्त्री आदि उपस्थित रहे।
शांतिपाठ एवं प्रीतिभोज के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।






