बाबा साहेब के पश्चात राजा भैया, जिन्होंने संविधान की वास्तविक रक्षा हेतु कही ठोस बात – दिव्य अग्रवाल (सनातनी विचारक व लेखक)

विचार :संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे तो वह बुरा सिद्ध होगा यह शब्द डा भीमराव रामजी अंबेडकर जी के थे साथ ही साथ उनका इस्लाम के संबंध में कहना था की जब धार्मिक पहचान राष्ट्रीय पहचान से ऊपर हो जाए, तो राष्ट्र निर्माण कठिन होगा इसलिए उन्होंने मुस्लिम लीग की राजनीति और पृथक राष्ट्र की मांग की आलोचना भी की थी पर बाबा साहेब भी एकेले क्या करते इस्लामिक समाज ने अपनी कटटर मजहबी सोच और भीड़ तंत्र के चलते इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान बनाया और वहां आज संविधान की क्या स्थिति है यह सर्वविदित है।
बाबा साहेब ने मुस्लिमों के संगठन मुस्लिम लीग पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि मुसलमान स्वयं को अलग “क़ौम” मानते हैं इसलिए वे अलग राष्ट्र की मांग कर रहे हैं। इतना ही नहीं बाबा साहेब ने तो देश में इस्लामिक विभाजन को लेकर ग्रीस-तुर्की के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा था की यदि विभाजन हो तो जनसंख्या की पूरी अदला-बदली हो। उनका मानना था कि यदि भारत में मिश्रित आबादी रही तो भविष्य में लगातार संघर्ष का कारण बनेगी अब जरा ये बताओ जब बाबा साहेब जैसे महान विद्वान , दूरदर्शी एवं संघर्षशील व्यक्ति यह मानते थे कि मुसलमान जो स्वयं को अलग कौम मानते हैं उनका भारत की मिश्रित आबादी में रहना संघर्ष का कारण बनेगा तो इस स्थिति में राष्ट्र और संविधान की रक्षा कैसे होगी।
सत्यता तो यह है बाबा साहेब के पश्चात स्वतंत्र भारत में संविधान की रक्षा हेतु यदि किसी ने कोई ठोस और मजबूत बात कही है तो वह कुंडा विधायक राजा भैया ने कही है अन्यथा संविधान के नाम पर अनेको लोग और राजनीतिक दल राजनीति करते हुए सामान्य जन को भ्रमित ही करते आए हैं। राजा भैया ने बाबा साहेब की बात को अपने शब्दों में कहा की, सनातन है तो संविधान सुरक्षित है क्योंकि बतौर बाबा साहेब तो इस्लामिक कौम स्वयं को राष्ट्र से अलग ही मानती है जिनका मिश्रित आबादी में रहना भी संघर्ष को ही जन्म देगा इसलिए बाबा साहेब ने कहा था कि संविधान तभी अच्छा रहेगा जब उसको चलाने और मानने वाले लोग अच्छे होंगे तो यह बताओ इस्लाम तो संविधान से ज्यादा महत्वपूर्ण शरीयत को मानता है तो यदि सनातनी समाज की संख्या घटी तो संविधान को सुरक्षित कौन करेगा और कौन मानेगा।
लेकिन राजनीतिक षड्यंत्र के चलते राजा भैया द्वारा संविधान रक्षार्थ कही गयी बात को काटकर क्लिप चलाई गई जिससे जनमानस को लगे की संविधान विरोधी बात कही गयी है अब जब पूरी चलचित्र लोगो तक पहुँच रही है तो जनमानस कह रहे हैं की जिस सत्य को कहने में लोग कतराते थे राजा भैया ने वह सत्य कहा यदि सनातन है तो संविधान है और संविधान है तो राष्ट्र की अस्मिता सुरक्षित है।
बाबा साहेब पुरे राष्ट्र के लिए आदर्श हैं जो भारत का गौरव थे, हैं और रहेंगे पर उनके नाम पर संविधान के नाम का सहारा लेकर कुछ लोग षड्यंत्र कर रहे हैं अभद्र एवं असंवैधानिक शब्दों का उपयोग कर रहे हैं समाज के लोगो को ऐसे लोगो का बहिष्कार करना चाहिए जो बाबा साहेब के नाम जय भीम को जय मीम के साथ जोड़कर हिन्दू समाज के अभिन्न अंग अनुसूचित जनजाति समाज को भ्रमित कर रहे हैं ।
अब रही बात राजा भइया की तो कभी राजस्थान जाईये जो उत्तर प्रदेश की राजनीति से बाहर का प्रदेश है वहां मजहबी आतंक से त्रस्त होकर पाकिस्तान से आएं हिन्दू, शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं जरा उनकी पीड़ा को सुनिए वो दलित हिन्दू समाज के ही हैं उनके साथ इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान में क्या क्या हुआ ऐसे पीड़ित लोगो की राजा भइया निरंतर सहायता करते हैं और उसी क्रूरता को देखकर उस पीड़ा को महसूस कर कह रहे हैं की यदि संविधान को सुरक्षित करना है तो सनातन को सुरक्षित करना होगा अन्यथा जहाँ शरीयत है वहां संविधान को कोई नहीं मानता।





