राजा भैया ने प्रमाणित कर दिया उम्र केवल एक संख्या, लक्ष्य पर अडिग एकाग्रता सफलता का पर्याय- दिव्य अग्रवाल (विचारक व लेखक)

विचार:क्ले पिजन ट्रैप शूटिंग निशानेबाजी विश्व की सबसे कठिन और अत्यधिक तकनीकी स्पर्धाओं में गिनी जाती है। यह प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन (ISSF) के मानकों के अनुरूप आयोजित की जाती है। इसमें मशीन (ट्रैप हाउस) से लगभग 90 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से विभिन्न दिशाओं और कोणों पर कृत्रिम लक्ष्य (क्ले टारगेट) प्रक्षेपित किए जाते हैं। निशानेबाज को लक्ष्य के प्रक्षेपित होते ही कुछ ही क्षणों में उसकी दिशा और गति का सटीक अनुमान लगाकर अपनी 12 बोर शॉटगन से उसे भेदना होता है। इस खेल में प्रत्येक लक्ष्य मात्र कुछ सेकंड के लिए ही दृश्य में रहता है, इसलिए एक क्षण की भी चूक पदक की दौड़ से बाहर कर सकती है।
इस स्पर्धा में सफलता केवल निशानेबाजी तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसके लिए वर्षों का कठिन अभ्यास, अद्भुत मानसिक एकाग्रता, तीव्र निर्णय क्षमता, हाथ और आंखों का उत्कृष्ट समन्वय, संतुलित शारीरिक मुद्रा, नियंत्रित श्वास, तेज प्रतिक्रिया तथा दबाव में भी संयम बनाए रखने की क्षमता आवश्यक होती है। यही कारण है कि विश्व के श्रेष्ठ निशानेबाज भी इस प्रतियोगिता को अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानते हैं।
नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के आजीवन सदस्य माननीय श्री रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ ने 49वीं उत्तर प्रदेश स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए एस-25 क्ले पिजन ट्रैप शूटिंग (एनआर) पुरुष व्यक्तिगत वर्ग में कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया।
शूटिंग ऐसा खेल है, जिसमें केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मानसिक एकाग्रता, धैर्य, सही समय पर निर्णय लेने की क्षमता और वर्षों के अभ्यास की आवश्यकता होती है। राजा भैया ने जिस आत्मविश्वास और सटीकता के साथ लक्ष्य साधा, वह इस बात का प्रमाण है कि समर्पण और निरंतर अभ्यास के सामने उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद शस्त्र और निशानेबाजी के प्रति उनका लगाव और नियमित अभ्यास प्रेरणीय है। इस आयु में भी जिस प्रकार उन्होंने खिलाड़ियों के बीच उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पदक हासिल किया, वह उनकी खेल भावना, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचायक है। उनका यह प्रदर्शन संदेश देता है कि यदि मन में जुनून और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो हर चुनौती को पुरुषार्थ से सफलता में बदला जा सकता है।






