राम-ईश इंस्टीट्यूट में एआई आधारित फार्मा हेल्थकेयर पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन

ग्रेटर नोएडा: राम-ईश इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एंड टेक्निकल एजुकेशन, ग्रेटर नोएडा द्वारा 21-22 अगस्त 2026 को “डिराइविंग एआई इनोवेशन: बेस्ट प्रैक्टिसेज़ फॉर इम्प्लीमेंटेशन इन फार्मा हेल्थकेयर” विषय पर एकेटीयू प्रायोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. आर. सी. शर्मा एवं मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) अनिल गुलाटी, संस्थापक, चेयरमैन एवं सीईओ, फारमाज़ इंक., अमेरिका तथा प्रोफेसर एमेरिटस मिडवेस्टर्न यूनिवर्सिटी एवं यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय एट शिकागो, यूएसए द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई 
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रो. गुलाटी ने बताया कि प्रयोगशाला में किए गए वैज्ञानिक शोध का सीधा लाभ आम मरीजों तक मिलना चाहिए। उन्होंने दवाओं की खोज और उसके विकास में आ रहे वैश्विक बदलावों पर प्रकाश डाला। 
डॉ. आर. सी. शर्मा (चेयरमैन, राम-ईश ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस) ने गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक रिसर्च और फार्मास्युटिकल डेवलपमेंट में राम-ईश इंस्टीट्यूट की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि संस्थान हमेशा से ही विद्यार्थियों और फैकल्टी को विश्वस्तरीय अनुसंधान, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और वैश्विक उद्योग-अकादमिक सहयोग के माध्यम से नवाचार के नए अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय , उत्तर प्रदेश के कुलपति प्रो. (डॉ.) जे. पी. पांडेय ने ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया तथा फार्मास्युटिकल शिक्षा, अनुसंधान एवं स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
मिस प्रतिभा शर्मा (मैनेजिंग डायरेक्टर , राम-ईश ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस) ने अपने सम्बोधन में कहा कि फार्मास्यूटिकल अनुसंधान केवल वैज्ञानिक प्रगति और नई औषधियों की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव कल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
संस्थान की प्राचार्या, प्रो. (डॉ.) पल्लवी मनीष लव्हाले, ने सभी सम्मानित अतिथियों, वक्ताओं, शोधकर्ताओं एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक सहयोग को नई दिशा प्रदान करते हैं।
ऑनलाइन सत्र में भी कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए, जिनमें प्रो. (डॉ.) वन्नाजन संघिरन ली (यूनिवर्सिटी ऑफ मलाया, मलेशिया), डॉ. हरलोकेश नारायण यादव (एम्स, नई दिल्ली), डॉ. भगवत प्रसाद (यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी, अमेरिका) तथा डॉ. विवेक अग्रहरि (वर्जीनिया हेल्थ साइंसेज, अमेरिका) प्रमुख रहे।
तकनीकी सत्रों में डॉ. सौरभ श्रीवास्तव (नाइपर हैदराबाद), प्रो. मयमूना अख्तर (जामिया हमदर्द), डॉ. रोहित बिष्ट ( पेटा इंडिया), डॉ. वैशाली पाटिल (सीसीएस यूनिवर्सिटी, मेरठ), डॉ. अनूप कुमार (डीआईपीएसएआर यूनिवर्सिटी), डॉ. शीलेंद्र प्रताप सिंह (सीएसआईआर-आईआईटीआर, लखनऊ) तथा डॉ. विनोद तिवारी (आईआईटी-बीएचयू, वाराणसी) ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।
भारत के ६० से अधिक प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने सम्मेलन में उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए २०० से अधिक मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों में औषधि अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य सेवा, नवाचार तथा फार्मास्यूटिकल विज्ञान के विभिन्न समकालीन विषयों पर किए गए शोध एवं नवीन विचारों को प्रस्तुत किया गया ,डीपीएसआरयू, दिल्ली के प्रो. (डॉ.) शरद वाकोडे ने सम्मेलन की प्रोसीडिंग्स का विमोचन किया।
समापन समारोह में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष डॉ. जशुभाई चौधरी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की। इस अवसर पर प्रतिभागियों एवं शोध प्रस्तुतकर्ताओं को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। सम्मेलन की संयोजक प्रो. (डॉ.) रीमा सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. संदीप कुमार बंसल (विभागाध्यक्ष, डिप्लोमा इन फार्मेसी), डॉ. अज़हर दानिश खान, , पंकज कुमार और संपूर्ण शिक्षण एवम् शिक्षकेतर स्टाफ उपस्थित रहे






